बाज़ार की तरह जीवन में भी अनिश्चितता कोई कम नहीं। पिछले गुरुवार (26 अक्टूबर) को 101 डिग्री तक बुखार चढ़ा तो लगा कि क्रोसीन वगैरह लेकर मामला ठीक हो जाएगा। लेकिन अगले दिन वो और चढ़ गया। 102 बुखार में किसी तरह शुक्रवार का कॉलम लिखा। दोपहर होते-होते बुखार 103 के पार चला गया। हालत इतनी खराब हो गई कि अंततः अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। कल ही रात अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर वापस आया हूं।औरऔर भी

यह कोई विज्ञापन या झूठा दावा नहीं, बल्कि सच है। इसमें आप खुद अपनी मदद कर सकते हैं और बहुत सारी दवाओं को 80 फीसदी तक कम दाम पर खरीद सकते हैं। यह सुविधा उपलब्ध कराई है एक वेबसाइट ने। पता है medguideindia.com या मेडगाइडइंडिया डॉट कॉम। यह साइट वैसे तो पांच साल पहले शुरू की गई थी। लेकिन अब धीरे-धीरे यह लोकप्रिय होती जा रही है। इस साइट को विनोद कुमार मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट की तरफऔरऔर भी

ये शरीर, हम और हमारा अवचेतन। अभिन्न हैं, फिर भी स्वतंत्र हैं। हम सोते हैं तो अवचेतन सुश्रुत वैद्य की तरह हमारी मरहम पट्टी में लग जाता है। शरीर तो मर्यादा पुरुषोत्त्म है। बस, हम ही बावले हैं।और भीऔर भी