वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार बिटकॉयन जैसी किसी भी क्रिप्टो या डिजिटल करेंसी के विज्ञापनों पर कोई बंदिश नहीं लगाने जा रही। ज़मीनी स्थिति यह है कि एनडीटीवी जैसा चैनल तक कॉफी एंड क्रिप्टो जैसा प्रायोजित शो चला रहा है। महानगरों पर कारों पर आपको क्रिप्टो से जुड़े विज्ञापन देखने को मिल जाते हैं। माहौल बनाया जा रहा है कि क्रिप्टो पर बैन लगाना गलत होगा। हमारी सरकार ने कहाऔरऔर भी

नए-नए बच्चे बस इतना देख रहे हैं कि एक बिटकॉयन 42 लाख रुपए और 56,000 डॉलर से ज्यादा का है। एक-एक दिन की ट्रेडिंग में लाखों का वारा-न्यारा। वे नहीं समझना चाहते कि कंप्यूटर साइंस व टेक्नोलॉजी के महारथी बिटकॉयन से लेकर दूसरी क्रिप्टो करेंसी की माइनिंग करते हैं। सामान्य लोग यह काम नहीं कर सकते। फिर ये लोग जो मुद्रा पैदा करते हैं, दूसरे उसमें ट्रेड करते हैं। दुनिया भर में प्रचार और विज्ञापन से इनकीऔरऔर भी

दुनिया के वित्तीय बाज़ारों में तेज़ी का उन्माद क्या अब बुलबुला बनकर फूटने की स्थिति में आ गया है? दुनिया के सफलतम निवेशक वॉरेन बफेट के सहयोगी चार्ली मुंगेर का कहना है कि इस वक्त शेयर बाज़ार में करीब दो दशक पहले के डॉटकॉम बूम से भी ज्यादा पागलपन सवार है। यह पागलपन अब स्टॉक्स के बाहर क्रिप्टो तक फैल चुका है, जिसे कुछ लोग अब करेंसी कहने से बचने लगे हैं। मुंगेर का कहना है किऔरऔर भी

अपना शेयर बाज़ार गिरते-गिरते संभल जा रहा है। हालाकि देर-सबेर उसका गिरना तय है। लेकिन अहम सवाल है कि गिरा तो कहां तक गिर सकता है? जानकार कहते हैं कि निफ्टी-50 अगर अपने शिखर से 20% गिर जाए यानी 15,000 से नीचे पहुंच जाए तो कोई अचम्भा नहीं करना चाहिए। दरअसल 20% गिरना बाज़ार के तेज़ी से मंदी के दौर में चले जाने की सर्वमान्य परिभाषा है। अभी तो नकारात्मक खबर भी सकारात्मक असर दिखा जाती है,औरऔर भी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई या एफआईआई) ने नवंबर में भारतीय शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट से 39,912 करोड़ रुपए निकाले हैं। लेकिन न जाने किस आधार पर एनएसडीएल इस दौरान एफपीआई की शुद्ध बिकवाली का आंकड़ा मात्र 5945 करोड़ रुपए दिखा रहा है। हो सकता है, वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट के आंकड़े भी मिला देता हो। लेकिन ऐसा करने पर गलत तस्वीर सामने आएगी क्योंकि ऑप्शंस का मूल्य दिए गए प्रीमियम के आधार पर नहीं, बल्किऔरऔर भी

जानकार बोलते हैं कि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के समय शेयर बाज़ार ज्यादा नहीं गिरा था। इस बार भी हो सकता है कि ओमिक्रॉन का ज़ोर का झटका धीरे से लगकर निकल जाए। लेकिन जिस तरह से अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की कगार पर हैं और मुद्रास्फीति दुनिया के तमाम देशों में गम्भीर समस्या बनती जा रही है, वैसे में शेयर बाज़ार इन वजहों से भी धराशाई हो सकता है। तब उभरते देशों से विदेशी निवेशकऔरऔर भी

घबराहट व अफरातफरी के माहौल में रिटेल ट्रेडर बहुत ज्यादा चौकन्ने हो जाते हैं और दो कदम पीछे, एक कदम आगे की डिफेंसिव रणनीति अपनाते हैं। वहीं, बड़े व प्रोफेशनल ट्रेडर रिस्क को समझते हुए एक कदम पीछे, दो कदम आगे की एग्रेसिव रणनीति अपनाते हैं। असल में तमाम जानकारों का मानना है कि डेल्टा वैरिएंट भी बाज़ार को ज्यादा गिरा नहीं पाया था तो ओमिक्रॉन का असर भी अंततः कुछ दिनों बाद ठंडा पड़ जाएगा। वैसेऔरऔर भी

कोरोना वायरस का डेल्टा से कहीं ज्यादा खतरनाक वैरिएंट ओमिक्रॉन दुनिया में दस्तक दे चुका है। बताते हैं कि दक्षिण अफ्रीका में किसी एचआईवी संक्रमित मरीज से म्यूटेट होकर निकले इस वैरिएंट पर वैक्सीन भी असर नहीं करती। यूरोप से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक इसकी धमक पहुंच चुकी है। भारत सरकार भी चौकन्नी हो गई है। हालांकि कुछ डॉक्टरों का कहना है कि अपने यहां जीनोम सीक्वेंसिंग का व्यापक सुविधा नहीं है तो कोरोना मरीजों के असली वायरसऔरऔर भी

वित्तीय बाजार में ट्रेडिंग से कमाने निकले हैं तो पहली बात समझ लीजिए कि यह एक बिजनेस है। लागत जितनी कम होगी, मुनाफे का मार्जिन उतना ज्यादा होगा। दूसरी बात, आपके पास बहुत सीमित पूंजी है। इस ट्रेडिंग पूंजी को हमेशा इतना बचाना है कि यह उड़ने न पाए। तीसरी और अंतिम बात। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना अपने दिलोदिमाग को संयत रखते हुए दूसरों के मनोविज्ञान को ताड़ने का खेल है। शेयरों के रोज़मर्रा केऔरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में अब पायथन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) का नया फंडा घुमाया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि पायथन के साथ एआई और एमएल सीख लिया तो बाज़ार में कभी हार नहीं सकते। 100% सफलता की गारंटी। बस कोडिंग की भाषा सीखते जाइए। क्या कहा? इसे सीखना बहुत कठिन है, आपके लिए मुमकिन नहीं! कोई बात नहीं, हम आपको सॉफ्टवेयर दिला देते हैं। आइरिस+ आपको 55 से 60औरऔर भी