सेबी जल्द ही आर्ट फंडों पर कसेगी लगाम

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी जल्द ही कलाकृतियों, एंटीक की चीजों, दुर्लभ सिक्कों व स्टैंप कलेक्शन में निवेश करनेवाले फंडों के लिए कड़े नियम तय कर सकती है। सेबी का मकसद इस तरह के निवेश में काले धन के प्रवाह को रोकना और सच्चे निवेशकों के हितों का संरक्षण है।

सेबी पेंटिंग, प्राचीन दुर्लभ वस्तुओं, सिक्कों और डाक टिकटों में निवेश करने वाले फंडों को ‘सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस)’ मानता है। इसके नाते ऐसे सभी निवेश फंड उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। पूंजी बाजार नियामक संस्था के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट को यह जानकारी देते हुए कहा कि इस तरह के निवेश में अवैध धन के प्रवाह की आशंका और आम निवेशकों के जोखिमों में फंस जाने की स्थिति के मद्देनजर सेबी इन फंडों के लिए विशेष नियम बनाने पर विचार कर रही है।

बता दें कि वैश्विक स्तर पर कला कोष या आर्ट फंड काफी लोकप्रिय हैं और अमीरों के लिए इन्हें निवेश का बेहतरीन विकल्प माना जाता है। वहीं दूसरी ओर पिछले कुछ साल से भारत में भी ऐसे कोष पैर जमाने में लगे हैं। लेकिन भारत में कला या ऐसे अन्य कोषों के लिए कोई विशेष नियम नहीं हैं। सेबी इस बारे में जल्द विभिन्न संबंधित पक्षों, मसलन केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के साथ इस क्षेत्र के लिए विशेष नियम बनाने के वास्ते विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू करेगी।

भारत में 2008 में कला कोष दिखने शुरू हुए थे। उस समय बाजार नियामक ने निवेशकों को चेताया था कि वे ऐसे कला कोषों या स्कीमों व इकाइयों में निवेश न करें जो सेबी के पास पंजीकृत नहीं हैं। उस वक्त सेबी ने कहा था कि उसने तमा आर्ट फंडों के विश्लेषण से पाया है कि ये चलाए तो सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआईएस) के रूप में जा रहे हैं, लेकिन सेबी में पंजीकरण कराए बिना। जबकि नियमतः कोई भी सीआईएस सेबी में पंजीकरण कराए बगैर नहीं चलाई जा सकती। लेकिन आर्ट फंडों के लिए अभी तक अलग से कोई नियम नहीं हैं।

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