मुक्ति की अवस्था

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  1. उपरी तत्व, जीव हि ईश्वर है, इस समाज पर निर्भर है. जीव ईश्वर नाही है. ईश्वर तो सर्वमय , केवळ आनंदमय, उसे जीव बनानेकी कोई आवश्यकता नाही . वे श्रीमद्भगवद्गीता मानते है; लेकीन जाणते नाही. जानेंगे तो सामाझेंगे कि ईश्वर ना जीव है ना कि श्रुष्टी हुआ.

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