कंपनियों को सलाह देगा आईसीएआई

एकाउंटिंग क्षेत्र की नियामक संस्था आईसीएआई (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया) ने एक सलाहकार समिति का गठन किया है जो कंपनियों को सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं की पहचान करने में मदद करेगी जिन पर वे साल भर में अपने शुद्ध लाभ का दो फीसदी खर्च कर सकती हैं। बता दें कि कंपनियों को अपने शुद्ध मुनाफे का दो फीसदी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) गतिविधियों पर खर्च करना होता है।

आईसीएआई के नवनियुक्त अध्यक्ष जी रामास्वामी ने कहा कि इस लोक सलाहकार समिति का गठन जनहित संरक्षण को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘हमने जनहित में मदद के लिए लोक सलाहकार समिति का गठन किया है। आईसीएआई बेहतर और व्यावहारिक परियोजनाओं की पहचान करेगा और कंपनियों व जनता के बीच सलाहकार की भूमिका निभाएगा।’’

उन्होंने कहा कि हम कंपनियों को उन सीएसआर परियोजनाओं को चुनने को कहेंगे, जो उनके उद्योग से संबंधित हैं। उदाहरण के लिए रसायन उद्योग से जुड़ी कंपनियां पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व की परियोजनाएं हाथ में ले सकती हैं। कंपनी विधेयक-2009 में प्रावधान है कि कंपनियों को अपने पिछले तीन साल में हुए औसत शुद्ध मुनाफे का 2 फीसदी हिस्सा सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना होगा। साथ ही उन्हें शेयरधारकों को इस बारे में अपनाई गति नीति की जानकारी देनी होगी।

उद्योग का कहना था कि उन्हें अपनी सीएसआर गतिविधियों की निगरानी खुद करने की इजाजत दी जानी चाहिए और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सरकार ने इसे मान लिया है। सीएसआर पर खर्च के बारे में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय का प्रस्ताव है कि 500 करोड़ रुपए या इससे ज्यादा नेटवर्थ (इक्विटी + रिजर्व) या 1000 करोड़ या इससे ज्यादा टर्नओवर या साल भर में 5 करोड़ रुपए से ज्यादा शुद्ध लाभ कमानेवाली हर कंपनी को अपनी सीएसआर नीति बनानी होगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के मामले में 500 करोड़ रुपए या इससे ज्यादा मुनाफा कमानेवाली कंपनी को अपने शुद्ध लाभ का 0.5 से 2 फीसदी, 100 से 500 करोड़ तक के शुद्ध लाभ वाली कंपनियों को 2 से 3 फीसदी और 100 करोड़ रुपए से कम शुद्ध लाभ वाली सरकारी कंपनियों को लाभ का 3 से 5 फीसदी हिस्सा सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना होगा।

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