बोगस बैलेंस शीट, नकली टर्नओवर!

निफ्टी और सेंसेक्स दोनों लगभग सपाट। लेकिन बाजार में छाई निराशा का कोई अंत नहीं है। ट्रेडर हलकान हैं। निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई को लेकर परेशान हैं। वे तमाम ऐसी कंपनियों में कसकर फंस चुके हैं, जिनके शेयर अच्छे फंडामेंटल्स के बावजूद उनकी खरीद के भाव से नीचे ही नीचे चल रहे हैं। दरअसल, बाजार अपना मूल चरित्र खो चुका है और उस पर सट्टेबाजी और जोड़तोड़ हावी हो गई है।

हालत यह है कि आज बोगस बैलेंस शीट बनाना और टर्नओवर तैयार करना बाएं हाथ का खेल हो गया है। इससे बाजार पूंजीकरण बढ़ाने में मदद मिलती है और फिर तमाम देशी-विदेशी फंड उसमें खरीद शुरू कर देते हैं। वीआईपी इंडस्ट्रीज 34 रुपए पर अच्छी खरीद था। हमने तब इस पर रिपोर्ट जारी की थी। लेकिन उस वक्त किसी ने उसे भाव नहीं दिया। अब वीआईपी 900 रुपए पर पहुंच गया है तो सारी दुनिया उसके पीछे दौड़ पड़ी है। एफआईआई तक इस स्टॉक को खरीद रहे हैं।

आप इस बात पर गौर करें। मुझे बताया गया कि कच्चे तेल के गिरते मूल्य से वीआईपी का परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) बढ़ गया है। लेकिन मुझे समझ में नहीं आता कि 2009 तक वीआईपी घाटे में कैसे चल रही थी, जबकि उस समय कच्चे तेल का दाम ऐतिहासिक रूप से सबसे कम 32 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था? आपके पास है कोई इसका जवाब या सुराग? जो शख्स इसके पीछे है, उसका नाम का सही अंदाजा लगाना आपके लिए कतई मुश्किल नहीं है। सीए रहा यह शख्स जिस भी कंपनी में हाथ लगाता है, अचानक उसका टर्नओवर बढ़ने लगता है, बैलेंस शीट चमचमाने लगती है। क्यों और कैसे?

एशियन ऑयलफील्ड के प्रेफरेंशियल इश्यू में 76 रुपए पर शेयर जारी किए थे। इसका स्टॉक फिलहाल गिरकर 60 रुपए पर आ चुका है। मेरा कहा गांठ बांध लीजिए कि दो साल बाद यही स्टॉक हमारे सुझाए तमाम दूसरे शेयरों की तरह बढ़कर 500 रुपए पर होगा क्योंकि कुछ बड़े उस्तादों ने प्रेफरेंशियल इश्यू में कंपनी के शेयर हासिल किए हैं। ऐसा ही मामला डीसीएम लिमिटेड का है। आज आप भरोसा करें या न करें। लेकिन फिलहाल इसकी तुलना वीआईपी से करके देखें और तीन साल बाद आप ही मुझसे कहेंगे कि हां, हमारा चुनाव एकदम सही था।

डीसीएम ने इसी हफ्ते दस रुपए के शेयर पर 2.50 रुपए का लाभांश घोषित किया है। यह साफ संकेत इस बात का है कि उसकी पहली तिमाही के नतीजे अच्छे रहनेवाले हैं। इस स्टॉक में अभी भरपूर गुंजाइश बाकी है क्योंकि तीन फंडों ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। अभी यह 85 रुपए के आसपास अटका है। असल में इसके भाव को भी वीआईपी के शुरुआती दौर की तरह दबाकर रखा गया है जब कुछ निहित स्वार्थ वाले लोगों ने उसे बढ़ने नहीं दिया था और जब उन्होंने इसे जमकर बटोर लिया तो इसका क्या हाल है, इसे आप देख ही रहे हैं।

अमेरिका का ऋण संकट सुलट जाएगा। भारतीय बाजार का मूल्यांकन अभी ज्यादा महंगा नहीं है। कल की गिरावट का खास कारण स्टॉक डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट का न होना था। सेबी के नए दिशानिर्देशों ने प्रतिकूल अधिग्रहण की राह खोल दी है। इससे अच्छी कंपनियों का प्रबंधन कम से कम 51 फीसदी इक्विटी अपने पास रखने को मजबूर हो जाएगा। नहीं तो तेजी के बाजार में हमेशा उसका रात-दिन का चैन उड़ा रहेगा। यह सभी पहलू आज से शुरू हुए सेटलमेंट में तेजी का पुख्ता आधार बना रहे हैं।

देखिए, बाजार हमें कहां ले जाता है। फिलहाल तो यहां भयंकर निराशा छाई है। वैसे, फिडेलिटी इंटरनेशनल ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वे भारत में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं क्योंकि ब्याज दरों में जितनी वृद्धि होनी थी, अब तक हो चुकी है। मेरी भी यही सोच है। यही विचार है।

सभी चहकते-दमकते लोगों को अक्सर कुछ राज़ छिपाने पड़ते हैं। आमतौर पर यह कि उनकी सारी चहक दूसरे लोगों से मिल रही तारीफ पर आश्रित है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का फीस-वाला कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

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