रीयल्टी को राहत, स्टील को रियायत, रुई व लौह अयस्क का निर्यात मुश्किल

वित्त वर्ष 2010-11 का बजट आज लोकसभा में पास हो गया। लेकिन इससे पहले सरकार ने कॉफी किसानों को कर्ज में राहत, रुई व आयरन ओर निर्यात को महंगा करने, स्टेनलेस स्टील उद्योग को राहत, नए अस्पताओं को कर रियायत और रीयल्टी व कंस्ट्रक्शन उद्योग में सेवा कर में थोड़ी छूट देने का ऐलान कर दिया। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वित्त विधेयक में नए संशोधनों का प्रस्ताव रखा जिसे ध्वनिमत से पास कर दिया गया। लेकिन उन्होंने हवाई यात्राओं पर सेवा कर और पेट्रोल, डीजल व उर्वरक पर बढ़े हुए शुल्क को वापस लेने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि शुल्क बढ़ाने के बजाय मैं प्रशासनिक मूल्य बढ़ाने की राह चुन सकता था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया क्योंकि यह सही नहीं होता। पेट्रोल व डीजल वगैरह पर शुल्क बढ़ाने से राज्य सरकारों को 32 फीसदी हिस्से के रूप में 26,000 करोड़ रुपए मिलेंगे। बता दें कि 26 फरवरी को वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कच्चे तेल पर 5 फीसदी, पेट्रोल व डीजल पर 7.5 फीसदी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर 5 फीसदी बेसिक ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा था। साथ ही पेट्रोल व डीजल पर प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी 1 रुपए बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया था। विपक्ष ने इसके विरोध में कटौती प्रस्ताव भी पेश किया। लेकिन वित्त मंत्री ने किसी की नहीं सुनी और अब वित्त विधेयक पास होने के बाद यह प्रस्ताव की जगह फैसला बन गया है।

सेवा करः वित्त मंत्री ने घरेलू व अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं पर प्रस्तावित सेवा कर में किसी राहत से मना कर दिया है। उनका कहना था कि इससे किसी भी क्लास की घरेलू यात्रा पर अधिकतम 100 रुपए और इकोनॉमी क्लास की अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर 500 रुपए तक का बोझ पड़ेगा जो किसी भी नजरिए से ज्यादा नहीं है। वित्त मंत्री ने कंस्ट्रक्शन क्षेत्र को सेवा कर में थोड़ी राहत दी है। पहले जमीन पर उस पर हुए निर्माण के कुल मूल्य के 33 फीसदी पर सेवा कर लेने का प्रस्ताव था, लेकिन इसे घटाकर 25 फीसदी कर दिया गया है। साथ ही कम्पलीशन सर्टिफिकेट से संबंधी कुछ प्रक्रियागत दिक्कतों को भी सुलझाया जाएगा। इस समय केवल नेशनल काउंसिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से संबद्ध संस्थानों को सेवा कर में छूट मिल रही थी। इसे अब सारे वोकेशनल कोर्सों पर लागू कर दिया गया है।

प्रत्यक्ष कर रियायतः अभी तक कुछ इलाकों को छोड़कर बाकी जगहों पर बननेवाले 100 बिस्तर से अधिक क्षमता के अस्पताओं को आयकर कानून की धारा 80-आईबी (11सी) के तहत सौ फीसदी कर छूट मिलती थी। यह छूट अब देश में कहीं भी बननेवाले 100 बिस्तर से ज्यादा क्षमतावाले नए अस्पताओं को दे दी गई है। झुग्गियों के पुनर्वास के लिए राजीव आवास योजना समेत केंद्र या राज्य सरकारों की किसी भी परियोजना को निवेश संबंधी कर रियायत दी जाएगी। अगर किसी कंपनी को लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) में बदला जाता है तो कंपनी के शेयरधारकों को इस बदलाव में होने वाले शेयर ट्रांसफर पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।

अप्रत्यक्ष कर में तब्दीलीः इस साल 9 अप्रैल 2010 से रुई के निर्यात पर 2500 रुपए प्रति टन का निर्यात शुल्क लगाया गया था। निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए यह शुल्क बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति टन कर दिया गया है। दिसंबर 2009 में आइरन ओर लंप पर निर्यात शुल्क 5 से बढ़ाकर 10 फीसदी और फाइंस पर शून्य से बढ़ाकर 5 फीसदी किया गया था। अब आइरन ओर लंप पर यह शुल्क बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। दूसरी तरफ घरेलू स्टेनलेस स्टील उद्योग की मांग को ध्यान में रखते हुए इसके मेल्टिंग स्क्रैप पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 5 से घटाकर 2.5 फीसदी कर दी गई है। इसी तरह रद्दी कागज पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर 4 फीसदी कर दी गई है।

कैंसर की दो और एड्स की एक दवा समेत 11 खास दवाओं पर कस्टम ड्यूटी घटाकर पांच फीसदी कर दी गई है। इन दवाओं को सीवीडी (काउंटर वेलिंग ड्यूटी) से भी बरी कर दिया गया है। हाथ से बनाए जानेवाले चुरुट पर एक्साइज ड्यूटी 3 रुपए तक की स्टिक पर घटाकर 10 फीसदी कर दी गई है और एडिशनल एक्साइज ड्यूटी की दर 1.6 फीसदी हो गई है। पहले केवल सुपारी पर एक्साइज ड्यूटी में पूरी छूट दी गई थी। अब सुगंधित सुपारी को भी यह रियायत दे दी गई है। अभी लघु क्षेत्र की इकाइयां अगर दूसरे के ब्रांड नाम से कोई सामान बनाती हैं तो उन पर एक्साइज की छूट नहीं मिलती। लेकिन अब हर तरह की पैकिंग सामग्री पर यह छूट दे दी गई है।

कॉफी किसानों को कर्ज राहतः जिन कॉफी किसानों से 2002 के पहले कर्ज लिया है, उनके बकाया कर्ज का आधा हिस्सा माफ कर दिया जाएगा। यह रकम प्रति किसान ज्यादा से ज्यादा 5 लाख रुपए हो सकती है। इस कर्जमाफी का बोझ केंद्र सरकार उठाएगी। इसके अतिरिक्त 25 फीसदी बकाया कर्ज बैंक माफ कर देंगे और बाकी 25 फीसदी हिस्से की अदायगी का नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। 2002 के बाद के कर्जों का 10 फीसदी माफ किया जाएगा और इसमें अधिकतम रकम एक लाख रुपए होनी चाहिए। साथ की इन किसानों के फसल ऋण का 20 फीसदी हिस्सा माफ किया जाएगा जिसमें से 10 फीसदी बोझ केंद्र सरकार और 10 फीसदी बोझ बैंक उठाएंगे। इस पैकेज से केंद्र सरकार पर कुल 241.33 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा, जबकि किसानों को 362.82 करोड़ रुपए की राहत मिलेगी।

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