देश की मौद्रिक संस्था भारतीय रिजर्व बैंक कहने को अब भी स्वायत्त है। हालांकि मोदी सरकार ने पिछले बारह सालों में उसका ऐसा बधियाकरण किया है कि सरकार की हां में हां मिलाना उसकी फितरत बन गई है। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखना, आर्थिक विकास को सुगम बनाना और इसके अनुरूप नीतियां बनाना उसकी ज़िम्मेदारी है। लेकिन सरकार को खुश रखने के चक्कर में वो इतना असंगत हो गया है कि उसका रुख, अनुमान और फैसला एक दिशाऔरऔर भी

इस समय सब-ब्रोकर भले ही किसी न किसी ब्रोकर के साथ जुड़ कर काम करते हैं। लेकिन उनका स्वतंत्र वजूद होता है। पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के पास उन्हें पंजीकरण कराना पड़ता है। लेकिन अगर सेबी की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश मान ली गई तो पूंजी बाजार के मध्यवर्ती के रूप में सब ब्रोकर के नाम को ही खत्म कर दिया जाएगा और वे ब्रोकरों के एजेंट या कर्मचारी बन कर रह जाएंगे। सेबी ने पूंजीऔरऔर भी