हमें हर चीज का मूल्य दूसरों की नज़र से आंकना चाहिए। कोई चीज हो सकता है कि हमें मूल्यवान न लगे, लेकिन दूसरों के लिए वह बहुमूल्य हो सकती है। या, हमें मूल्यवान लगे और दूसरों को फालतू।और भीऔर भी