सच जानकर चालबाज़ों को भगाएं दूर

चार दिन पहले पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने चार फर्मों – राइट ट्रेड, बुल ट्रेडर, लक्ष्मी ट्रेडर्स और साई ट्रेडर पर बैन लगा दिया। इन फर्मों को सूरत से चलाया जा रहा था और इनके पीछे दो लोग थे – इम्तियाज़ हनीफ खांडा और वाली ममद हबीब घानीवाला। घानीवाला इम्तियाज़ का मामा है। ये लोग अपनी वेबसाइट ‘राइट ट्रेड डॉट इन’ के जरिए और मोबाइल पर एसएमएस भेजकर लोगों को शेयर और कमोडिटी बाज़ार से हर दिन 5000 से लेकर 75,000 रुपए तक की कमाई करवाने का झांसा देते थे।

जैसे, उनका संदेश होता था – If you want to earn daily 5000 to 75,000 in equity and MCX market with our confirm intraday tips contact now for sure shot call at… यहां पर वे तीन अलग-अलग मोबाइल नंबर देते थे। टिप्स में वे इंट्रा-डे कॉल्स, पोजिशनल कॉल्स, निफ्टी व बैंक निफ्टी में जैकपॉट कॉल्स और स्टॉक फ्यूचर्स की कॉल देते थे। उनकी कोशिश विदेशियों को भी फंसाने की थी। इनके लिए केवल स्टॉक फ्यूचर्स के लिए महीने भर की फीस उन्होंने 300 डॉलर (करीब 19,500 रुपए) रखी थी। साथ ही एक स्कीम रखी थी – पे पर कॉल जिसमें मुनाफे में 30 फीसदी हिस्सा बांटने का प्रावधान था।

सेबी ने जांच के बाद पाया कि इनका सारा धंधा हवा-हवाई है। यही नहीं, वे सेबी में रजिस्ट्रेशन के बगैर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवाएं (पीएमएस) भी चला रहे थे। सेबी को जांच से पता चला कि इम्तियाज़ असली कलाकार था। उसने अपने मामा घानीवाला से ‘नो योर क्लाएंट’ के कागजों पर दस्तखत करवा लिए थे। घानीवाला को शेयर बाज़ार का एबीसीडी भी नहीं आता। सेबी ने इन दोनों लोगों पर शेयर बाज़ार में सीधे या किसी और के जरिए कोई भी खरीद, बिक्री या अन्य डील करने पर रोक लगा दी है। हालांकि इन्हें तीन हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करने का मौका भी दिया गया है।

सवाल उठता है कि क्या सेबी की इस कार्रवाई से एसएमएस या वेबसाइट या अन्य तरीकों से शेयर बाज़ार में निवेश को उत्सुक आम लोगों को लूटने का धंधा बंद हो जाएगा? शायद नहीं क्योंकि जहां गुड़ है, वहां चीटियां आएंगी ही आएंगी। जब तक हम लोग लालच में फंसकर बिना दिमाग लगाए शेयर बाज़ार से खटाखट नोट बनाने की सोच से बाहर नहीं निकलेंगे, तब ऐसे धंधेबाज़ भेष बदलकर हमारी बचत पर डाका डालते रहेंगे। फिर, सेबी ने तो अभी एक साइट बंद करवाई है। ऐसी सैकड़ों साइट्स आज भी चल रही हैं। जैसे, एक का नाम है बेस्ट स्टॉक एनालिसिस। यह साइट घाटकोपर (पूर्व) मुंबई से चलाई जा रही है और इसका काम शुद्ध रूप से लोगों को फंसाना है। ऐसे ही किन्हीं अजय शर्मा का एसएमएस मेरे पास पड़ा है जो निफ्टी फ्यूचर्स में ‘101% Sure Shot’ टिप्स देने का दावा करते हैं।

दोस्तों! हर महीने आपसे पांच, दस, पच्चीस हज़ार झटककर ऐसे चालबाज़ अपना धंधा चमका रहे हैं। लेकिन अकेले सेबी की कड़ाई से इन पर रोकथाम नहीं लगेगी। अरे, सेबी ने अनिरुद्ध शेट्टी पर भी तो बैन लगा रखा है। लेकिन वह अब भी तमाम ट्रेडरों व निवेशकों के बीच ‘चमत्कारी बाबा’ बना हुआ है। एक बात जान लें कि शेयर बाज़ार में अगले पल क्या होनेवाला है, इसकी कोई निश्चितता (certainty) नहीं है। केवल प्रायिकता (probability) है। यह अकाट्य सत्य है जिसे दुनिया के सफलतम ट्रेडरों व निवेशकों से बार-बार दोहराया है। इसलिए हमारा आग्रह है कि आप कम से कम शेयर बाज़ार में इस तरह के ‘चमत्कारी’ धंधेबाज़ों से जितना दूर रहें, उतना अच्छा।

आप कहेंगे कि अर्थकाम भी तो टिप्स दे रहा था और महीने का 1100 रुपए लेता है। इस कॉलम का तो नाम ही है चुटकी भर टिप्स। लेकिन मित्रों! यहां टिप्स आपको फैसले लेने में मदद के लिए है। हमारा ज्यादा ज़ोर शेयर बाज़ार की वास्तिवक स्थिति से आपको वाकिफ कराने पर है। हम चाहते हैं कि आम लोग इतने जानकार बन जाएं कि वे निवेश और ट्रेडिंग के अच्छे फैसले खुद ले सकें। यह जानकर धन लगाएं कि यहां इतना जोखिम है, पर रिटर्न भी उसी अनुपात में मिल सकता है। फीस हमने इसलिए रखी है कि ताकि आप लोगों के सहयोग के वित्तीय साक्षरता के इस यज्ञ को अखंड बनाया जा सके, अनवरत चलाया जा सके।

हम असल में इन पेड-सेवाओं से दूसरी सेवाओं को सब्सिडाइज़ करना चाहते हैं। जैसे, जल्दी ही हम फाइनेंस की पाठशाला शुरू करने जा रहे हैं जिसकी कोई फीस नहीं होगी। इसमें हम बताएंगे कि कैसे आज के 100 रुपए की तुलना साल भर के बाद के 100 रुपए से नहीं की जा सकती है। उसी तरह जैसे आम और अमरूद की तुलना नहीं की जा सकती। हम बताएंगे कि बांड और स्टॉक का अंतनिर्हित मूल्य कैसे निकाला जाता है। यह भी कि पोर्टफोलियो में कितनी कंपनियों के शेयर रखने पर अकेली कंपनियों का खास जोखिम आपस में कटकर नष्ट हो जाता है और केवल बाज़ार का आम जोखिम बचता है। इसके बाद हम अच्छे स्टॉक्स छांटने के लिए फंडामेंटल एनालिसिस के गुरु आपको सिखाएंगे। एकदम सीधे, सहज आसान तरीके से। कल को ट्रेडिंग की ऐसी गूढ़ विद्या भी आपको बताएंगे जो पूरे भारत में गिने-चुने लोग ही जानते हैं।

अर्थकाम का सफर अभी बहुत लंबा है। हम सेबी से लेकर रिजर्व बैंक तक के सहयोग से आप तक पूंजी बाज़ार की सच्चाई पहुंचाने में लगे हैं। इसमें हमारा स्वार्थ यही है कि जब आप वित्तीय रूप से पूरी तरह साक्षर हो जाएंगे तो आप जैसे करोड़ों भारतीयों की रिस्क पूंजी नए उद्यमों की तरफ सोच-समझकर आने लगेगी, देश में हमारी जैसी हज़ारों उद्यमी प्रतिभाओं को नया आधार मिलेगा और हमारा देश एक दिन दलालों के चंगुल से निकलकर सही मायनों में आत्मनिर्भर हो सकेगा। आमीन! तथास्तु!!

आपकी पूंजी आने लगेगी तो भारतीय शेयर बाज़ार किसी एफआईआई का मोहताज़ नहीं रहेगा और अमेरिका के फेडरल रिजर्व के चेयरमैन बेन बरनान्के का फैसला हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। आज तो स्थिति यह है कि मई में आया बरनान्के का एक बयान तीन महीने के भीतर निफ्टी को 15.7 फीसदी गिरा कर 6230 से 5240 तक पटक चुका है। ऐसा तभी नहीं होगा, जब आम भारतीयों की रिस्क कैपिटल पूंजी बाज़ार में आएगी। जब ऐसा होगा, तभी देश का सही औद्योगिकीकरण होगा। अभी तो दलालों मौज है, वही लोग मज़ा कर रहे हैं, बाकी सारे उद्यमी व सच्चे लोग सज़ा भोग रहे हैं।

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