आशा बजट से, कहो न आस निरास भई!

नई एनडीए सरकार के पहले बजट का दिन। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 11 बजे से लोकसभा में बजट भाषण पढ़ना शुरू कर देंगी। भाषण के पहले हिस्से में अधिकांश लोगों का ध्यान इस पर होगा कि रिजर्व बैंक से मिले 2.11 लाख करोड़ रुपए के छप्पर-फाड़ लाभांश के बाद सरकार अपना राजकोषीय़ घाटा कम करेगी या उसे पांच साल तक 81.35 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन देने की फूड सब्सिडी के हवाले कर देगी। विकसित भारत के लक्ष्य और गरीब, युवा, महिला व किसानों की चार जातियों के कल्याण की बातें तो सुनते-सुनते देश अब तक पक चुका है। सौर ऊर्जा और जलवायु संरक्षण की भी बातें होंगी। लेकिन यह नहीं बताया जाएगा कि दस साल बाद भी भारत दुनिया के उन 57 देशों में क्यों शामिल है जिन्होंने अभी तक जलवायु में हो रहे बदलावों से निपटने के लिए अपना राष्ट्रीय एक्शन प्लान (एनएपी) संयुक्त राष्ट्र को नहीं सौंपा है। बजट भाषण के दूसरे हिस्से में ज्यादातर लोगों को इंतज़ार है कि इनकम टैक्स में छूट की सीमा ढाई लाख से बढ़कर कम से कम पांच लाख रुपए की जाती है या नहीं। बजट प्रस्तावों में कहीं न कहीं आंध्र प्रदेश और बिहार के लिए विशेष अनुदान का जिक्र भी होना चाहिए ताकि चंद्रबाबू नायडू व नीतीश बाबू की बैसाखी कहीं छिटक न जाए। अब मंगलवार की दृष्टि…

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