बाजार अफवाह-तंत्र की गिरफ्त में

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की एजीएम के एजेंडा के बारे में कल एक ऐसी अफवाह उड़ाई गई, जो सचमुच बेहद चौंकानेवाली थी। बड़ी अजीब बात है कि प्रबंधन कुछ तय करे या न करे, बाजार के खिलाड़ी उससे पहले ही मनगढ़ंत एजेंडा तय कर देते हैं। आज सुबह हमारी मीटिंग में इस पर चर्चा हुई और पाया गया कि आरआईएल के बारे में उड़ाई गई बात एकदम असंभव है। यह उसी तरह की शरारत थी जैसी हमने कल आईसीआईसीआई बैंक को लेकर देखी थी। हमने तो कल भी बाजार में कारोबार के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था कि आईसीआईसीआई बैंक की छवि को खराब करने के लिए शरारत भरे ई-मेल और एसएमएस भेजे जा रहे हैं।

लगता है जैसे बाजार में इस समय पूरी एक संगठित मशीनरी काम कर रही है जो ऐसी कहानियां जब चाहे तब फैला देती है। इसकी रफ्तार तो कई सालों पहले गणेश की मूर्ति को दूध पिलानेवाली अफवाह फैलाने के तंत्र से भी तेज है। इसे किसी न किसी तरीके से रोका जाना जरूरी है।

खैर, बाजार पर आया जाए। मैं पिछले तीन दिनों से बाजार के बारे मंदी की धारणा लिये हुए था क्योंकि रोलओवर नहीं हो रहा था और ब्याज दरें बढ़ने का अंदेशा था। फिर भी, कल बाजार (निफ्टी) उछल कर 5290 पर पहुंच गया जिसके चलते आरआईएल की एजीएम से पहले शॉर्ट सेलर्स को अपने सौदे काटने को मजबूर होना पड़ा। हमें अब भी ऐसा लगता है कि अगर रोलओवर को आराम-आराम से होना है तो बाजार को अभी नीचे जाना चाहिए। लेकिन अगर बाजार के आला खिलाड़ी और एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) मौजूदा स्तर पर ही अपने सौदे आगे बढ़ाते हैं तो यह भी संभावना है कि अगले हफ्ते गुरुवार से पहले निफ्टी 5400 के ऊपर चला जाए। यह सारा कुछ वास्तविक शॉर्ट और लांग पोजीशन पर निर्भर करता है। इसलिए मेरी सलाह यही है कि हमें फ्यूचर्स में गुरुवार तक हाथ बांध कर रखना चाहिए और बी ग्रुप के शेयरों को बटोरने का क्रम चलाना चाहिए।

मैंने कल एक रिपोर्ट पढ़ी जिसमें इस्पात इंडस्ट्रीज की तरफ से कहा गया है कि वह अपना बिजली संयंत्र 100 करोड़ डॉलर में बेच रही है क्योंकि कर्ज देनेवाले कंपनी के चेयरमैन प्रमोद मित्तल के पीछे पड़े हुए हैं। कंपनी के ऊपर कुल 6700 करोड़ रुपए का ऋण है और बिजली संयंत्र की बिक्री से 100 करोड़ डॉलर (करीब 4614 करोड़ रुपए) मिलने से उस पर ऋण का बोझ काफी कम हो जाएगा। भारत में बिजली संयंत्रों की भारी मांग है। इसलिए क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशन प्लेलमेंट) के जरिए धन जुटाने में कोई मुश्किल नहीं होगी। इसके बाद आईडीबीआई से किए गए वादे के अनुरूप इस्पात इंडस्ट्रीज काफी हद तक ऋण-मुक्त हो जाएगी। बाकी का हिसाब-किताब आप खुद लगा सकते हैं।

गहरा पानी शांत बहता है और छिछला पानी बहुत अशांत होता है। इंसानों पर भी यही बात लागू होती है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

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