कैल्स रिफाइनरी की ‘स्पाइसी’ कहानी

कैल्स रिफाइनरी में कल बीएसई के बी ग्रुप में सबसे ज्यादा शेयरों का कारोबार हुआ। महज 3525 सौदों में उसके करीब 3.45 करोड़ शेयरों का लेन-देन हुआ। और, यह सिलसिला अभी से नहीं, हफ्तों से चल रहा है। पिछले दो हफ्ते में हर दिन औसतन उसके 3.92 करोड शेयरों के सौदे हुए हैं। चौंकिए मत, इसके 1 रुपए अंकित मूल्य के शेयर का भाव है 33 पैसे, जी हां मात्र 33 पैसे। आप कहेंगे कि बड़ी घटिया कंपनी होगी यह। नहीं, जनाब! यह कंपनी बीएसई-500 सूचकांक में शामिल है। इसकी इक्विटी या चुकता पूंजी है 794 करोड़ रुपए। कंपनी ने दिसंबर 2007 में जीडीआर (ग्लोबल डिपॉजिटरी रसीद) से 788 करोड़ रुपए जुटाए थे।

यह स्पाइस एनर्जी ग्रुप की कंपनी है जो मेटल, मिनरल्स से लेकर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सक्रिय होने का दावा करता है। दूसरी कंपनियों का हाल पता नहीं, लेकिन कैल्स रिफाइनरी ने पिछले कई सालों से एक धेला भी नहीं कमाया है क्योंकि पश्चिम बंगाल के हल्दिया में लग रही उसकी पेट्रोलियम रिफाइनरी का काम अधर में अटका पड़ा है। कंपनी ने इसी 15 मई को अपनी बोर्ड बैठक के बाद भरोसा जताया है कि रिफाइनरी के पहले चरण में एक लाख बैरल प्रति स्ट्रीम दिन (बीपीएसडी) की क्षमता पर व्यावसायिक उत्पादन अगले वित्त वर्ष 2011-12 की आखिरी तिमाही यानी मार्च 2012 तक शुरू हो जाएगा। हालांकि इस दौरान वह बीपीसीएल जैसी नामी कंपनियों से कई तरह के अनुबंध कर चुकी है। कंपनी के प्रबंधन में इंडियन ऑयल से लेकर रिलायंस व एस्सार ऑयल में काम कर चुके दिग्गज शामिल हैं।

कंपनी की इस परियोजना की लागत 5400 करोड़ रुपए है जिसमें 3500 करोड़ रुपए ऋण और 1900 करोड़ रुपए इक्विटी से जुटाए जाने थे। इक्विटी का हिस्सा तो जीडीआर वगैरह से जुटा लिया गया। लेकिन ऋण का इंतजाम नहीं होने से फाइनेंशियल क्लोजर लटकता चला जा रहा है और अभी तक स्पष्ट नहीं है कि ऐसा कब तक हो पाएगा। कंपनी ऋण जुटाने के लिए एसबीआई कैप्स से लेकर बीएनपी परिबास की सेवाएं ले चुकी है। कंपनी की इक्विटी में प्रवर्तकों की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी एसआरएम एक्प्लोरेशन नाम की फर्म के जरिए केवल 0.11 फीसदी है। लेकिन स्पाइस एनर्जी ग्रुप के प्रवर्तक संजय मल्होत्रा, रवि चिलुकुरी, गगन रस्तोगी और उनके परिवार के सदस्य कैल्स रिफाइनरी में तकरीबन 75 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं। उन्होंने जीडीआर के जरिए ये हिस्सेदारी हासिल की है। एफआईआई ने दिसंबर से मार्च 2010 की तिमाही में कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 4.23 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी कर ली है। इन एफआईआई में गोल्डमैन सैक्स, मेरिल लिंच कैपिटल और तैयब सिक्यूरिटीज शामिल हैं।

पूरी कहानी बहुत लंबी है। फिलहाल इस कहानी का मसालेदार या स्पाइसी तत्व यह है कि इसमें बहुतेरे पंटर सक्रिय हैं जिन्होंने तरह-तरह की कहानियां फैला रखी हैं। जैसे, मुकेश अंबानी कैल्स को खरीदनेवाले हैं। अनिल अंबानी अभी शेयरों में चल रहे खेल के पीछे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इसमें दरअसल बीजेपी के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन का पैसा लगा था। आदि-इत्यादि। कंपनी के शेयर पिछले साल 4 जून 2009 को 1.08 रुपए पर चले गए थे। नहीं तो वे कभी 65 पैसे तो कभी 27 पैसे के बीच घूमते रहे हैं। अभी एक पक्ष कहता है कि फाइनेंशियल क्लोजर जल्दी ही घोषित होनेवाला है और तब इसके शेयर 20 रुपए तक चले जाएंगे। दूसरा पक्ष कहता है कि यह तो 20 पैसे तक गिरनेवाला है। हो सकता है 5 पैसे भी हो जाए। यह भी संभव है कि कंपनी डीलिस्ट हो जाए और शेयऱधारकों को फूटी कौड़ी भी न मिले।

जानकार बताते हैं कि अभी इस शेयर में जो जबरदस्त कारोबार हो रहा है, उसके पीछे जीडीआर के रूट से काले धन को सफेद करने का मामला भी है। कुल मिलाकतर मामला ‘स्पाइसी’ ही नहीं, बड़ा ‘डायसी’ भी है। इतने छोटे में जितना मैं बता सकता था, आपको बता दिया। अब आपको अपने जोखिम लेने की क्षमता का इम्तिहान लेना है। यह याद रखिएगा कि एक-एक रुपए से ही एक लाख बनते हैं और एक रुपए कहीं से मुफ्त में नहीं, मेहनत से हासिल होते हैं।

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