भारत को यूरेनियम बेचने की जुगत में ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने भारत को यूरेनियम के निर्यात पर लगी रोक हटाने की पेशकश की है। गिलार्ड का कहना है कि अब वक्त आ गया है जब पुरानी स्थिति बदल दी जानी चाहिए। सिडनी में अगले महीने होने जा रहे लेबर पार्टी के सालाना सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा होगी और माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नीतियों में बदलाव के लिए सहमति हासिल कर लेंगी।

मंगलवार को मेलबर्न पत्रकारों से बातचीत में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरा मानना है कि लेबर पार्टी के लिए अपनी नीति को बदलने का वक्त आ गया है। भारत को यूरेनियम बेचना ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था और यहां नौकरियों के लिए अच्छा होगा।”

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया खुद तो परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल नहीं करता, लेकिन यह कजाकिस्तान और कनाडा के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है। हर साल वो 9600 टन ऑक्साइड कंसन्ट्रेट निर्यात करता है जिसकी कीमत करीब 110 करोड़ अमेरिकी डॉलर है। ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम का भंडार भी है। वर्ल्ड न्यूक्लियर एसोसिएशन के मुताबिक दुनिया का 23 फीसदी यूरेनियम ऑस्ट्रेलिया में है।

ऑस्ट्रेलिया फिलहाल चीन, जापान, ताइवान व अमेरिका को यूरेनियम का निर्यात करता है। लेकिन भारत को इसके काबिल इसलिए नहीं समझा गया क्योंकि उसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किए हैं। ऑस्ट्रेलिया की सत्ताधारी लेबर पार्टी इसे यूरेनियम के निर्यात की जरूरी शर्त मानती आई है।

जूलिया गिलार्ड का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कोशिशों के साथ भारत को एनपीटी पर दस्तखत करने के लिए मनाने के लिए काम करता रहा है। लेकिन अमेरिका के साथ 2005 में हुए नागरिक परमाणु संधि ने रणनीति बदल दी। उम्मीद की जा रही है कि भारत परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन को 2050 तक 40 फीसदी तक कर लेगा जो फिलहाल महज 3 फीसदी है। ऐसे में जूलिया गिलार्ड इसके आर्थिक पहलू पर ध्यान देते हुए भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर लेना चाहती हैं।

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