यह साल होगा रीयल्टी के नाम

बाजार आज थोड़ा दबकर बंद हुआ। हालांकि मेरा अंदाज था कि एनएवी के चक्कर में खरीद ज्यादा होगी। मुझे लगता है कि ज्यादातर फंड मैनेजर अपने कामकाज व उपलब्धि से खुश हैं और आखिरी वक्त पर उन्हें एनएवी की खास पड़ी नहीं है। असल में यह वित्तीय साल म्यूचुअल फंडों के लिए जबरदस्त रहा है।

वैसे, स्मॉल व मिड कैप शेयरों में सक्रियता बनी रही। फंडिंग की रुकावट दूर हो चुकी है और नई खरीद होने लगी है। नया वित्तीय साल रीयल्टी सेक्टर का होगा। यह बात नोट करके कहीं संभालकर रख लें।

कल से हम नया साल शुरू कर रहे हैं। अंतिम नतीजे आने का आगाज होगा। निगाहें मानसून पर भी लगी हुई हैं। शुरुआती संकेत यही हैं कि मानसून सामान्य रहेगा और खाद्यान्न उत्पादन में भारी बढ़त होगी। इससे हमारे जीडीपी का आंकड़ा मजबूत बना रहेगा।

हमने स्पाइस जेट में 34 रुपए पर खरीदने की सिफारिश की थी और अब यह 59 रुपए पर पहुंच चुका है। वह भी तब, जब मारन इसमें बहुमत हिस्सेदारी खरीद रहे हैं, यह खबर अभी सब तक पहुंची नहीं है। हमने एक बिजनेस चैनल पर यह खबर भी देखी कि एक जापानी कंपनी इस्पात इंडस्ट्रीज से हाथ मिलाने जा रही है। अगर इस्पात इंडस्ट्रीज का मूल्यांकन देखें तो वह इस समय मेटल उद्योग का सबसे सस्ता शेयर है और उसके नतीजे भी शानदार रहनेवाले हैं। मानें या न मानें, अगर इस्पात के प्रवर्तक मित्तल अपनी कंपनी बेचने को तैयार हों तो मैं उन्हें 50 रुपए प्रति शेयर के भाव पर भी अच्छा खरीदार दिला सकता हूं क्योंकि यह कंपनी अपने ऊपर चढ़े 6700 करोड़ रुपए के कर्ज के बावजूद नोट बनाने की मशीन का दमखम रखती है।

धीरे-धीरे बाजार को रीयल्टी सेक्टर की अहमियत समझ में आ रही है और इस सेक्टर पर मेरी कॉल, कुछ भी हो जाए, गलत नहीं हो सकती। मुझे यकीन है कि दाम आसमान छुएंगे और लाभ मार्जिन बेहतर होगा। अंधेरी, मुंबई में आकृति ने तीन महीने पहले एक प्रोजेक्ट शुरू किया था। तब बुकिंग की दर 8000 रुपए प्रति वर्ग फुट थी। अब उन्होंने इसका भाव बढ़ाकर 12500 रुपए प्रति वर्ग फुट कर दिया है यानी पहले से 55 फीसदी ज्यादा। फिर भी पूरी प्रॉपर्टी बिक चुकी है। क्या आप सोच सकते हैं कि बॉम्बे डाईंग वरली में 25,000 रुपए प्रति वर्ग फुट पर प्रॉपर्टी नहीं बेच पाएगी? ऐसा हो ही नहीं सकता।

इसलिए इस सेक्टर का उठना तय है। सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र पर 1.75 लाख करोड़ खर्च करने जा रही है, इससे भी इसे सेक्टर को भारी बल मिलेगा। सबसे ज्यादा छापे डेवलपरों पर पड़ते हैं क्योंकि आयकर विभाग भी मानता है कि यह सेक्टर सबसे ज्यादा कमाई कर रहा है और टैक्स की चोरी कर रहा है।

इसलिए इस सेक्टर में निवेश बनाए रखें। भारत अब भी एक छोटी अर्थव्यवस्था है जहां बजट के आंकड़े 10 लाख करोड़ रुपए के आसपास हैं। लेकिन वह दिन दूर नहीं जब यह आंकड़ा 20 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा। इससे अर्थव्यवस्था का आकार ही नहीं, समूचे उद्योग का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।

एफआईआई हर दिन निवेश बढ़ा रहे हैं और धीरे-धीरे मजबूती आकार ले रही है। ज्वालामुखी कभी भी फट सकता है और हम सेंसेक्स को 21,000 तक पहुंचता देख सकते हैं।

अगर आपको अपनी मजबूती और काबिलियत पर यकीन है तो पीछे मुड़कर देखने की कोई जरूरत नहीं है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है लेकिन फालतू के वैधानिक लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

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