दिया बचत का मौका, अब खर्च करो

जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी, वित्त मंत्री ने बजट 2010-11 में वह काम कर दिखाया। सभी को यही लग रहा था कि क्योंकि प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड) लागू होनी है, इसलिए शायद प्रणब मुखर्जी इस बार व्यक्तिगत आयकर की दरों या स्लैब में कोई तब्दीली नहीं करेंगे। बहुत हुआ तो करमुक्त आय के लिए होम लोन के ब्याज की सीमा को 1.5 लाख रुपए के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर देंगे। लेकिन उन्होंने आयकर की दरों के स्लैब को तो बढ़ा ही दिया, साथ ही ऐसी व्यवस्था भी कर दी है कि अब आप 80-सी के तहत निवेश पर एक लाख के बजाय 1.20 लाख रुपए का डिडक्शन पा सकते हैं।

पहले की तरह अब भी 1.60 लाख रुपए की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन पहले जहां 1.60 लाख से 3 लाख रुपए की आय पर 10 फीसदी टैक्स लगता था, वहीं अब नए वित्त वर्ष 2010-11 में 1.60 लाख से लेकर 5 लाख रुपए की आय पर टैक्स की दर 10 फीसदी रहेगी। यानी, 3 से 5 लाख रुपए तक की आय वालों को फायदा होगा। पहले इस आय समूह या स्लैब वाले लोगों को 20 फीसदी कर देना होता था। पहले 5 लाख से ऊपर की आय पर 30 फीसदी टैक्स लगता था। अब 5 से 8 लाख रुपए तक की आय पर 20 फीसदी और 8 लाख रुपए से अधिक की सालाना आय पर 30 फीसदी टैक्स लगेगा।

इस प्रस्ताव से साफ है कि साल में 3 से 8 लाख कमानेवाले सीधे-सीधे 20,000 रुपए से लेकर 50,000 रुपए की अतिरिक्त बचत कर पाएंगे। पहले की व्यवस्था की तरह महिलाओं को 1.90 लाख रुपए और 65 साल के ऊपर के सीनियर सिटीजन को 2.40 लाख रुपए की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। वित्त मंत्री ने इस स्थिति में कोई तब्दीली नहीं की है। इससे अधिक आय पर इन्हें भी दूसरों की तरह निर्धारित स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा।

नई व्यवस्था से साफ है कि साल में 8 लाख से ज्यादा कमानेवाले को बड़ा फायदा होगा क्योंकि आय के हर हिस्से पर अलग-अलग दर से टैक्स गिना जाता है। अगर कोई 10 लाख रुपए कमाता है तो उसे अब सरचार्ज या सेस को छोड़कर 1.54 लाख रुपए टैक्स देना होगा, जबकि इस साल तक उसका यह टैक्स 2.04 लाख रुपए बनता है।

यह कर बचत और ज्यादा हो सकती है। अभी तक वह आयकर की धारा 80-सी के तहत बीमा प्रीमियम, दो बच्चों की पढ़ाई, ईएलएसएस या होम लोन की मूलधन अदायगी के आधार पर कुल 1 लाख रुपए करयोग्य आमदनी से कम कर सकता था। लेकिन अब सरकार ने इसे बढ़ाकर 1.20 लाख रुपए करने का मौका दे दिया है, बशर्ते वह लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर बांड में 20,000 रुपए का निवेश कर दे।

इन प्रस्तावों से वित्त मंत्री का साफ मकसद है कि लोग बचत करें और खर्च करें। इससे अर्थव्यवस्था में आ रहे सुधार को और गति मिलेगी। साथ ही 80-सी में इंफ्रास्ट्रक्चर बांडों के 20,000 रुपए निवेश को शामिल कर देने से सरकार को लंबी अवधि की इन परियोजनाओं के लिए धन जुटाने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री का कहना है कि उनके नए आयकर प्रस्तावों से 60 फीसदी करदाताओं को फायदा मिलेगा। दूसरे शब्दों में हमारे 40 फीसदी करदाता अब भी साल में 3 लाख रुपए से कम कमाते हैं।

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