हैं परेशान कि बाजार बढ़ कैसे गया!

हर कोई आश्चर्य कर रहा है कि कैसे बाजार इतना बढ़ गया। निफ्टी 2.15 फीसदी बढ़कर 5140.20 और सेंसेक्स 2.11 फीसदी बढ़कर 17,099.28 पर जा पहुंचा। लेकिन इसमें हमारे लिए कोई चौंकने की बात नहीं थी क्योंकि हमें पता था कि भारतीय बाजार एकदम तलहटी पर पहुंच चुके हैं। ग्रीस को 76.9 करोड़ यूरो का अपना वाजिब हिस्सा मिल गया और यूरोप के बाजार 2 से 3 फीसदी बढ़ गए। ऐसे में स्वाभाविक था कि शॉर्ट के सौदागर परेशान हो गए कि उनकी गिनती में गड़बड़ी कहां से हो गई।

मिंट अखबार ने सुबह खबर लगाई कि सीबीआई रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के खिलाफ मामला दर्ज कर सकती है तो बाजार के खुलने पर बहुत से ट्रेडर इसमें शॉर्ट हो गए। लेकिन बाजार हमेशा पोजिशन के हिसाब से लांग या शॉर्ट करनेवालों को फंसाता है और आरआईएल इसका अपवाद नहीं रहा। यही बात बैंक निफ्टी, निफ्टी और एसबीआई के मामले में भी देखी गई।

केएसके एनर्जी वेंचर्स दिन में ऊपर में 108.50 तक चला गया। इसमें बाजार बंद होने के बाद भी 106.50 रुपए पर खरीद हुई है। हालांकि हमने इसमें 100 रुपए पर खरीदने की सलाह दी थी। बायबैक की खबर अब सामने आ चुकी है। हमारा मानना है कि यह स्टॉक अब 116 से 120 रुपए की मंजिल की तरफ बढ़ रहा है। इससे सबक यह निकलता है कि जो हो गया, उसके विश्लेषण से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आनेवाली संभावित घटनाओं पर नजर रखी जाए और उनके हिसाब से खरीद का फैसला किया जाए।

खैर, आज हमने एडुकॉम्प सोल्यूशंस, पिपावाव शिपयार्ड, आईएफसीआई, आरआईएल, सेंचुरी टेक्सटाइल्स, बॉम्बे डाईंग व फर्स्ट सोल्यूशंस वगैरह की मूलभूत सलाहों, शॉर्ट टर्म और पोजिशंस कॉल्स के अलावा अपनी सभी कॉल्स बंद कर दीं। अब बाजार जब भी गिरेगा और मौका देगा तो हम नए सिरे से एंट्री करने को एकदम तैयार हो गए हैं। बीईएमएल में हम अब भी ट्रिगर का इंतजार कर रहे हैं जिससे यह स्टॉक 550 रुपए तक जा सकता है। फिलहाल यह 479.45 रुपए पर चल रहा है। एडुकॉम्प व डीएलएफ हमारी खास-म-खास कॉल्स हैं जिनमें 30 फीसदी बढ़त की संभावना है। एडुकॉम्प पहले ही 10 फीसदी और डीएलएफ 6 फीसदी बढ़ चुका है। 30 फीसदी बढ़ने का लक्ष्य अगले 45 दिनों के लिए है और मेरा मानना है कि ऐसा होकर रहेगा।

पिछले 12 महीनों में यकीनन बाजार गिरावट का शिकार रहा। लेकिन सही रणनीति वालों से इस दौर में भी कमाई की है। हमने हर गिरावट का इस्तेमाल खरीदने के मौके के रूप में किया और खुद को ऐसे चुनिंदा स्टॉक्स तक सीमित रखा जिनमें कैश फ्लो अच्छा था। हमें इसके अपेक्षित नतीजे भी मिले हैं। निराशावाद कभी किसी की मदद नहीं करता। लेकिन दिमाग खुला रखें तो हमें ऑपरेटरों की चाल आसानी से समझ में आ जाती है।

यह मेरी समझ से बाहर है कि यूरोप में क्या हो रहा है, वहां का क्या संकट है, इस पर कोई बहस भारतीय निवेशकों को कैसे मदद कर सकती है? यह तो बीआईएफआर के हवाले किए जानेवाले मामले जैसा है। तय मानिए कि किसी तरह इसे बचा भी लिया गया तो समाधान ज्यादा नहीं टिकेगा। इससे भारत पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। पड़ा भी तो सकारात्मक असर ही पड़ेगा। लेकिन यह आपको तभी नजर आएगा जब आपमें सोचने-समझने की क्षमता शेष होगी।

इंसान इकलौता प्राणी है जो जैसा है, उसे मानने से इनकार कर देता है। अपनी हालत के प्रति इसी असंतोष ने उसे इंसान बनाए रखा है। नहीं तो किसी दूसरे जानवर और उसमें कहां कोई ज्यादा फर्क है!

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का पेड-कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

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