ये बनें या वो बनें, पर त्रिशंकु न बनें

मैंने आपको जो बताया था, वो सच हो गया। 5400 के आसपास मंदड़ियों मे भरपूर कोशिश की। लेकिन विकट हमले के बावजूद वे यह स्तर नहीं तोड़ सके। इससे उनको समझ में आ गया है कि बाजार अपना न्यूनतम स्तर पकड़ चुका है और अब इसे और नीचे ले जाना संभव नही। और, मैंने भी उनका सारा गोरखधंधा बेहद करीब से देखने के बाद बहुत कुछ सीखा है। हमने अप्रैल 2008 में निफ्टी जब 4800 पर था, तब भी आपसे कहा था कि बाजार अब तलहटी पकड़ चुका है। तब ज्यादातर मंदड़ियों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई थी क्योंकि वे 5200 के स्तर को लेकर भिड़े हुए थे।

निफ्टी आज 5800 के स्तर पर जाने के बाद अपनी बढ़त बनाए हुए है। सेंसेक्स भी 19,341 तक पहुंचने के बाद एक फीसदी बढ़त लेकर चल रहा है। यह सब फंडामेंटल कारकों का प्रभाव है। मैंने हमेशा अपनी राय मूलभूत कारकों या फंडामेंटल्स के आधार पर ही बनाई है। मैं भी गलत साबित होता हूं लेकिन तब, जब बाजार पर जबरदस्त जोड़तोड़ हावी हो जाती है और सही फंडामेंटल्स को झुठला दिया जाता है। असल में, इस समय भी टेक्निकल वाले दावा किए जा रहे हैं कि तीस मार खां हैं, सबसे अच्छे हैं। लेकिन उनकी दुर्दशा से हर कोई वाकिफ हो चुका है।

मेरे एक दोस्त ने निफ्टी के 5500 के आसपास रहने पर बड़े पैमाने पर शॉर्ट सौदे किए। उसे भरोसा था कि निफ्टी 4700 तक जाएगा। उसने इन सौदों को बीच में काटने के बजाय निफ्टी के 5200 तक गिर जाने पर नए शॉर्ट सौदे कर डाले क्योंकि सभी टेक्निकल वाले 4700 का संकेत बता रहे थे। वह अब भी शॉर्ट हुआ पड़ा है जबकि उसका सारा दांव पटरा हो चुका है। इस समय विलाप करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचा है।

यह शुरुआत करनेवालों के साथ-साथ परिपक्व निवेशक व ट्रेडर के लिए भी सबक है कि किसी को भी दोनों तरफ की कॉल्स नहीं लेनी चाहिए। वैसे भी दो नांवों पर सवारी नहीं की जा सकती और त्रिशंकु की स्थिति बहुत तकलीफदेह होती है। अगर आप तेजी के बाजार में हैं तो हर गिरावट पर खरीद कीजिए। अचानक अपना दिमाग मंदडियों की बिकवाली से पलटकर तेजड़ियों की खरीद तक ले जाने का कमाल जीएस (राधाकृष्ण दामाणी या ओल्ड फॉक्स) जैसे चंद लोग ही कर सकते हैं। अगर आप उनकी नकल करने की कोशिश करेंगे तो आपको बरबाद होने से कोई बचा नहीं सकता।

तेजी के बाजार का आगाज हो चुका है और यह सही वक्त है स्टॉक्स को चुन-चुन कर खरीदने का। जय हिंद।

जो हमारे पीछे है और जो हमारे सामने आगे है, उससे कहीं ज्यादा मायने रखता है कि हमारे भीतर क्या है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

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