आपके मानने या चाह लेने से कुछ नहीं होगा। हाय-तौबा मचाना निरर्थक है। पहले जो है, जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार कीजिए। अगली यात्रा वहीं से शुरू होगी। सीमाएं समझकर ही सीमाएं तोड़ी जाती हैं।और भीऔर भी