मन में आए भाव-विचार के माफिक शरीर रसायन बनाता है और शरीर में पहुंचे रसायन मन को घुमा डालते हैं। फिर, रसायन तो रक्त के साथ पोर-पोर तक जाता है तो मन भी हर पोर तक पहुंच जाता होगा!और भीऔर भी