बाजार को कल ही आईआईपी (औद्योगिक उत्पादन सूचकांक) के शानदार आंकड़ों के बाद 5600 के पार चला जाना चाहिए था। लेकिन भारतीय बाजार ने एक बार फिर साबित कर दिखाया कि वह कुछ ट्रेडरों और एफआईआई के कार्टेल के शिकंजे में है जो फिजिकल सेटलमेंट के अभाव में बाजार को जब चाहें, मनमर्जी से नचा सकते हैं। रिटेल निवेशक आईआईपी के घोषित होने के बाद उत्साहित होकर खरीद बढ़ाने लगे तो इस कार्टेल ने निफ्टी पर चोटकरऔरऔर भी

बाजार के 5185 अंक तक नीचे चले जाने के बाद हम तीसरी बार 5600 का स्तर छूने की राह पर हैं। बस, 75 अंक का फासला और बचा है। पहली दो बार हालात थोड़ा परेशान करनेवाले और नकारात्मक थे। लेकिन इस बार कच्चे तेल के अलावा ऐसा कोई बड़ा कारक नहीं दिख रहा। बल्कि बजट का पारित होना, कॉरपोरेट नतीजों का दौर, विश्व अर्थव्यवस्था की बेहतर स्थिति, एफआईआई की तरफ से हो रहे अपग्रेड़, वित्त वर्ष केऔरऔर भी