इस बार चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार तीन ऐसे वैज्ञानिकों को दिया गया है जिन्होंने पता लगाया है कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कैसे काम करती है। ये तीन वैज्ञानिक हैं – अमेरिका के ब्रूस ब्यूटलर, लक्जमबर्ग के जूल्स हॉफमैन और कनाडा के राल्फ स्टाइनमैन। इन तीनों को संयुक्त रूप से वर्ष 2011 का चिकित्सा क्षेत्र का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा सोमवार को की गई। पुरस्कार देने वाली स्वीडन की संस्था कैरोलिन्सका इंस्टीट्यूट ने एक बयानऔरऔर भी

अपने यहां इनकम टैक्स की अधिकतम दर 30% है,  जबकि चीन में यह दर 45%, जर्मनी में 45%, जापान में 50% और स्वीडन में 57% है। लेकिन टैक्स की कम दरों के बावजूद भारत में अवाम पर बोझ ज्यादा है। कारण, भारत में सामाजिक सुरक्षा नहीं है, जबकि यहां गिनाए गए सभी देशों में हर व्यक्ति को रिटायरमेंट पेंशन, स्वास्थ्य और बच्चों के पालन-पोषण की अनिवार्य बीमा सरकार की तरफ से मिलती है। ऊपर से भारत मेंऔरऔर भी

ईसाब इंडिया ने अपना कामकाज 1987 से शुरू किया। लेकिन इसकी कहानी 1904 में स्वीडन के शहर गोथेनबर्ग से तब शुरू हुई थी जब जहाजों व बॉयलरों पर काम कर रहे एक इंजीनियर ऑस्कर केलबर्ग ने पाया कि वहां रिपेयर के काम की क्वालिटी अच्छी नहीं है। बेहतर टेक्नोलॉजी की तलाश में केलबर्ग ने दुनिया के पहले कवर्ड इलेक्ट्रोड का आविष्कार कर डाला। वहीं से पैदा हुआ ईसाब (Elektriska Svetsnings Aktie Bolaget या ESAB) समूह जो इसऔरऔर भी