इस बार की बारिस में शेयर बाज़ार जिस ढलान पर फिसल रहा है, वो कहां जाकर थमेगी, कुछ नहीं कहा जा सकता। सारा दारोमदार विदेशी निवेशकों पर है। और, उनका रुख इससे तय होगा कि अमेरिका सिस्टम में डॉलर झोंकने का सिलसिला कब तक जारी रखता है। न तो विदेशी निवेशकों के रुख और न ही अमेरिका के केंद्रीय बैंक के फैसले पर हमारा कोई वश है। वश है तो इस बात पर कि पुराने ज़माने केऔरऔर भी

लोकतंत्र और बाज़ार में सारा खेल नंबरों का है। बड़ी-बड़ी बातें और भावुक फेंकमबाज़ी फालतू है। कांग्रेस भ्रष्ट। बीजेपी भी खिलाड़ी। दोनों को कर्णाटक में लोगों से वोट दिए। लेकिन 37% पाकर कांग्रेस जीत गई, जबकि बीजेपी व उससे छिटके दोनों दल कुल सूत भर कम वोट पाकर हार गए। बाज़ार में भी सूत भर का अंतर चलता है। डिमांड ज्यादा कि सप्लाई? हां, यहां भाव और मूल्य का अंतर भी अहम है। अभी आज का बाज़ार…औरऔर भी

फाइनेंस की दुनिया में चाहे कोई योजना बनानी हो, किसी स्टॉक या बांड का मूल्यांकन करना हो या बकाया होमलोन की मौजूदा स्थिति पता करनी हो, हर गणना और फैसला हमेशा आगे देखकर किया जाता है, पीछे देखकर नहीं। पीछे देखकर तो पोस्टमोर्टम होता है और पोस्टमोर्टम की गई चीजें दफ्नाने के लिए होती हैं, रखने के लिए नहीं। इसलिए बस इतना देखिए कि आपके साथ छल तो नहीं हो रहा है। भरोसे की चीज़ पकड़िए औरऔरऔर भी

मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पिछले तीन साल में 180% बढ़ चुकी हैं। दूसरी तरफ, ताजा खबरों के मुताबिक यहां 80,000 फ्लैट अनबिके पड़े हैं। सप्लाई भी ज्यादा और भाव भी ज्यादा!! ऐसा इसलिए क्योंकि अनबिके फ्लैट 4000-7000 वर्गफुट के हैं जिनकी औसत कीमत 1.4 करोड़ रुपए है। इतने बड़े फ्लैट तो भयंकर अमीर ही ले सकते हैं। अगर यही फ्लैट औसतन 5000 वर्गफुट के बजाय 1000 वर्गफुट के होते तो आज 4 लाख फ्लैट ऐसे होतेऔरऔर भी

शुक्रवार को विदेशी निवेश बैंक मैक्वारी ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में आगाह किया था कि भारत को कच्चे तेल का झटका लग सकता है क्योंकि रुपए में इसकी कीमत अब तक की चोटी पर पहुंच चुकी हैं। तेल की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति को धक्का दे सकती हैं और ब्याज दरों को घटाए जाने की संभावना खत्म हो सकती है। मैक्वारी के बाद अब देश की दो प्रमुख रेटिंग एजेंसियों क्रिसिल और केयर रेटिंग्स ने कच्चे तेल केऔरऔर भी

दुनिया में साल 2020 तक हीरे की मांग हर साल 6 फीसदी की दर से बढ़ती जाएगी और बढ़ती मांग में सबसे ज्यादा योगदान भारत और चीन का होगा। दुबई से मिली एक ख़बर के अनुसार अगले नौ सालों में दुनिया में हीरे की आपूर्ति जहां सालाना 2.8 फीसदी की दर से बढ़ेगी, वहीं हीरे की मांग में छह फीसदी सालाना का इजाफा होगा। बेन एंड कंपनी द्वारा जारी 2011 वैश्विक हीरा उद्योग रिपोर्ट में कहा गयाऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति के दहाई अंक में पहुंचने के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने माना है कि इसकी मुख्य वजह मांग का बढना नहीं है, बल्कि सप्लाई की कमी है। उन्होंने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार तेजी की मुख्य वजह खाद्य आपूर्ति की बाधाएं हैं और हमें देखना होगा कि हम इन्हें कैसे दूर सकते हैं। राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को विजया बैंक के 81वें स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन करने के बाद दौरान मुखर्जी नेऔरऔर भी

जब हम जवान होते हैं तो छोटी सी छोटी बात पर मरने पर उतारू हो जाते हैं। बूढ़े होते जाते हैं तो बड़ी सी बड़ी बात होने पर भी जीते रहना चाहते हैं। उम्र इफरात तो कोई भाव नहीं! उम्र कम तो इतना मूल्य!!और भीऔर भी

स्टील बनाने का मुख्य कच्चा माल आइरन ओर है। लेकिन देश में स्टील का उत्पादन मांग से कम होने के बावजूद हम आइरन ओर का जमकर निर्यात करते हैं। यहां तक कि भारत दुनिया में आइरन ओर का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। इस्पात मंत्रालय की तरफ से दी गई अद्यतन जानकारी के अनुसार अप्रैल-दिसम्‍बर 2010 के दौरान देश में 464.40 लाख टन स्टील घरेलू इस्‍तेमाल के लिए उपलब्‍ध था, जबकि इसकी मांग 518 लाख टनऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने माना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य जिंसों की कीमतों में तेजी से देश पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। मंगलवार को राजधानी दिल्ली में उद्योग संगठन फिक्की की 83वीं सालाना आमसभा को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा, ‘‘दुनिया के बाजार में जिंसों की कीमतों से देश में महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीयऔरऔर भी