जब सभी लोग एक ही बात सोच रहे होते हैं तो दरअसल कोई नहीं सोच रहा होता। वे बस भेड़चाल का हिस्सा हैं। सभी को एक जैसा सोचवाना आज की प्रचार मशीन का एक उत्पाद है। इसलिए आज के दौर सबसे उल्टा सोचने की आदत डालना जरूरी है।और भीऔर भी

मैं किसी के पास पूछने नहीं गया कि उसे क्या चाहिए। मैं अपने में डूबा तो डूबता ही चला गया और गहरी डुबकी के बाद जो निकाल कर लाया तो सभी जोर-जोर से कहने लगे – अरे यही तो हमें चाहिए था।और भीऔर भी