ऋण से धन तक
इंसान और उसके रिश्तों को चलानेवाली मूल वृत्तियां हैं – काम, क्रोध, मद, लोभ, भय। समाज को सही करना है तो इन्हीं वृत्तियों को काम में लगाना होगा। सामाजिक विविधता के तंत्र में ये सभी नकारात्मक वृत्तियां एक-दूसरे को काट देंगी। जहर दवा बन जाएगा। और भीऔर भी
सारा गरल तो गटक गया है बाजार
मुद्रास्फीति बढ़कर 9.06 फीसदी हो गई। चीन तक ने ब्याज दरें 0.50 फीसदी बढ़ा दी हैं। अब तो बाजार के लोगों को सचमुच यकीन हो चला है कि रिजर्व बैंक 16 जून को ब्याज दरें 0.50 फीसदी बढ़ा देगा। इतनी बुरी खबरों के बावजूद निफ्टी 5520 तक जाने के बाद 5500 के ऊपर बंद हुआ है। यह क्या दर्शाता है? हमने पहले भी कहा था और हमें अब भी लगता है कि यही बाजार के सही मूल्यांकनऔरऔर भी





