एक तो इसका नाम ही बड़ा विचित्र है। समझ में नहीं आता कि कैसे उच्चारण करें। एआरएसएस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स। कंपनी के प्रवर्तक अग्रवाल बंधु हैं तो ए शायद वहां से आया होगा। राजेश अग्रवाल प्रबंध निदेशक हैं तो आर वहां से आया होगा, सुबाष अग्रवाल चेयरमैन हैं तो एक एस वहां से आया होगा। सौमेंद्र पटनायक निदेशक (वित्त) हैं और कंपनी से शुरू से जुड़े हैं तो हो सकता है दूसरा एस वहां से आ गया हो।औरऔर भी

हर दिन 52 हफ्तों का पहला या आखिरी दिन होता है और हर दिन कोई कंपनी 52 हफ्ते का शिखर बनाती है तो कोई कंपनी 52 हफ्ते के रसातल पर चली जाती है। तो क्यों न हम रसातल में जानेवाली कंपनियों से कुछ समय के लिए ध्यान हटाकर उन कंपनियों पर लगाएं तो अपनी संभावनाओं के दम पर इस पस्त बाजार में भी सीना तानकर बढ़ी जा रही हैं। ऐसी ही एक कंपनी है कार्बोरनडम यूनिवर्सल। उसकेऔरऔर भी

मछली को पकड़ने चलो और वो हाथ से सरक कर भाग जाए। कुछ ऐसा ही हाल ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज का है। इसका शेयर 10 मई 2011 को 324 रुपए का न्यूनतम स्तर पकड़ने के बाद परसों 13 जून तक 37.56 फीसदी बढ़कर 445.70 रुपए चुका था। जैसे ही इसे पकड़ने का ख्याल दिमाग में आया कि कल यह फिर 5.42 फीसदी उछलकर 469.85 रुपए पर जा पहुंचा। इस तरह 10 मई से 13 जून के बीच यह शेयरऔरऔर भी

यह खबर का ही प्रताप है कि कल जब बाजार एकदम फ्लैट रहा, तब भी अतुल ऑटो का शेयर 6.45 फीसदी बढ़कर बंद हुआ। हालांकि दिन में यह 7.91 फीसदी तक बढ़कर 133.05 रुपए पर पहुंच गया था। लेकिन बंद हुआ 131.25 रुपए पर। यह भी अजब संयोग है कि ठीक साल भर पहले आज ही के दिन 14 जून 2010 को अतुल ऑटो का शेयर अपने न्यूनतम स्तर 70.05 रुपए पर था। मान लें कि किसीऔरऔर भी