सिद्धांत की बात करें तो किसी भी स्टॉक में निवेश करने के तीन सबसे प्रमुख आधार हैं: कंपनी की मूलभूत ताकत, अंतर्निहित मूल्य के सापेक्ष उसका भाव, कंपनी का प्रबंधन। लेकिन व्यवहार में कभी लालच तो कभी डर हमारे निवेश पर हावी हो जाता है। किसी ने कहा कि इसमें धन चार गुना हो जाएगा तो आंख मूंदकर खरीद लिया। दूसरे बेचने लगें तो हम भी बिना सोचे-समझे बेचने लगते हैं। यह गलती छोड़ें। देखें यह कंपनी…औरऔर भी

मारुति सुजुकी का प्रबंधन 40 स्थाई कर्मचारियों को वापस लेने पर सहमत हो गया है। साथ ही 1200 अस्थाई कर्मचारियों को बहाल करने की बात भी स्वीकार कर ली है। इसके बाद शुक्रवार की सुबह कंपनी के मानेसर संयंत्र में पिछले 14 दिनों से जारी कर्मचारियों की हड़ताल खत्म हो गई। सुजुकी पावरट्रेन और सुजुकी मोटरसाइकिल में भी हड़ताल खत्म हो गई है। समझौते के मुताबिक, कर्मचारियों को हड़ताल के दौरान काम नहीं करने पर वेतन काऔरऔर भी

मारुति सुजुकी में जून से लेकर अब तक करीब 60 दिन तक चली हड़ताल से हरियाणा सरकार को 350 करोड़ रुपए की एक्साइज ड्यूटी और 35 करोड़ के सेल्स टैक्स का नुकसान हो चुका है। खुद मारुति को करीब 1540 करोड़ रुपए की चपत लगी है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि मारुति प्रबंधन कमर्चारियों की जिस यूनियन को मान्यता देता है, उसमें पिछले 11 सालों से गुप्त मतदान के जरिए कोई चुनाव नहीं हुए हैं।औरऔर भी

देश की सबसे बड़ी कार-निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के मानेसर संयंत्र में शुक्रवार शाम 4 बजे से मजदूर फिर से हड़ताल पर चले गए हैं। मजदूर यूनियन ने इसकी वजह कंपनी प्रबंधन की हठधर्मिता और वादाखिलाफी को बताया है। वहीं कंपनी प्रवक्ता ने इसका ज्यादा खुलासा नहीं किया। लेकिन इस बात की पुष्टि की कि मानेसर संयंत्र में उत्पादन पूरी तरह रोक दिया गया है। बता दें कि पिछले हफ्ते शनिवार, 1 अक्टूबर को मारुति के प्रबंधनऔरऔर भी

देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया के मानेसर संयंत्र में हड़ताल जारी रहने से कारों का उत्पादन पूरी तरह से ठप है। हड़ताल का आज, सोमवार को दसवां दिन है। प्रबंधन और मजूदरों में आज भी बात चली। लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। हालांकि उत्पादन ठप रहने से मारुति के शेयर खास फर्क नहीं पड़ा है। आज उसमें 0.35 फीसदी की मामूली गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया, ‘‘बातचीतऔरऔर भी

कर्मचारी भविष्य निधि कोष संगठन (ईपीएफओ) के नए कोष प्रबंधकों की नियुक्ति पर फैसला नहीं हो पाने के बीच संगठन ने तय किया है कि फिलहाल अगले तीन महीने तक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) अकेले ही 3.5 लाख करोड़ रुपए के भविष्य निधि कोष का प्रबंधन देखेगा। राजधानी दिल्ली में बुधवार को भविष्य निधि संगठन के ट्रस्टियों की हुई बैठक में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया कि मौजूदा तीन अन्य कोष प्रबंधकों, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एचएसबीसीऔरऔर भी