कुंडली पर विश्राम
2010-06-06
जब हम व्यक्ति से लेकर समाज और अंदर से लेकर बाहर की प्रकृति के रिश्तों को तार-तार समझ लेते हैं तो हमारी अवस्था क्षीरसागर में शेषनाग की कुंडली पर लेटे विष्णु जैसी हो जाती है। हम मुक्त हो जाते हैं।और भीऔर भी
जब हम व्यक्ति से लेकर समाज और अंदर से लेकर बाहर की प्रकृति के रिश्तों को तार-तार समझ लेते हैं तो हमारी अवस्था क्षीरसागर में शेषनाग की कुंडली पर लेटे विष्णु जैसी हो जाती है। हम मुक्त हो जाते हैं।और भीऔर भी
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