शरीर की स्वतंत्र चाल है। मन भी स्वतंत्र और उच्छृंखल है। लेकिन दोनों एक दूसरे से स्वतंत्र नहीं। दोनों अभिन्न हैं। एक की चाल दूसरे को प्रभावित करती है। इसलिए अगर एक को ठीक रखना है तो दूसरे का भी उतना ही ख्याल रखना जरूरी है।और भीऔर भी

बुरे का बोलबाला तभी तक है जब तक अच्छे लोग उदासीन या चुप बैठे रहते हैं। दुनिया में नया ज्ञान, माल व मूल्य तो अच्छे लोग ही लाते हैं। बुरे लोग तो बस उसे इधर-उधर कर लूटते-लपेटते रहते हैं।और भीऔर भी