बाजार की हालत दुरुस्त हो चली है और एफआईआई ने अच्छे शेयरों को बटोरना शुरू कर दिया है। मीडिया की सुर्खियां भी दिखाती हैं कि हाउसिंग लोन घोटाले या रिश्वतखोरी का मामला अब धीरे-धीरे सम हो रहा है। हालांकि बाजार के लोगों को अब भी समझ में नहीं आया है कि यह गिरावट एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों और ऑपरेटरों को ठिकाने लगाने के लिए थी क्योंकि रिटेल ने कोई खास खरीद कर नहीं रखी थी। खरीदऔरऔर भी

आम के सीजन में आंधी आने पर हम बाग में दौड़-दौड़ कर जमीन पर गिरे फलों को बोरे में भर लिया करते थे। लेकिन न तो अब वो जमाना रहा और न ही शेयर बाजार किसी गांव के आम के बाग की तरह है जहां आंधी-तूफान में गिरा हर फल मीठा होता है। यहां तो हर हर स्टॉक को आगे-पीछे, ऊपर-नीचे हर तरफ से जांच कर ही उठाया जाना चाहिए। इधर बहुत सारे शेयर खटाखट 52 हफ्तोंऔरऔर भी

बाजार रोलओवर की पीड़ा से गुजर रहा है। अभी तक केवल 74,000 करोड़ रुपए के ओपन इंटरेस्ट अगले सेटलमेंट में ले जाए गए हैं और ज्यादातर सौदों का वारा-न्यारा करना बाकी है। असल में मंदड़िए रोलओवर करने को तैयार नहीं हैं। इसीलिए बाजार में इतने ऊंच-नीच की हालत है। लेकिन गांठ बांध लें कि बाजार एकदम अच्छी तरह सुधरेगा और बहुत जल्द ही वह (निफ्टी) 6500 की मंजिल का रुख कर लेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत निफ्टीऔरऔर भी

कहा जा रहा है कि बाजार गिरावट का शिकार हो गया क्योंकि चीन के ब्याज दरें बढ़ाने से अमेरिका व यूरोप के साथ-साथ एशिया के भी बाजारों को भी चोट लगी है। लेकिन असली वजह यह नहीं है। अगर ऐसा होता तो बाजार बिना आपको कोई मौका दिए हुए सीधे 300 अंकों की गिरावट के साथ खुलता। लेकिन बाजार तो कमोबेश सपाट स्तर पर खुला। ज्यादा समय बढ़त की स्थिति में रहा और सारी बिकवाली कारोबार केऔरऔर भी

ग्रेन्यूल्स इंडिया के बारे में तकनीकी विश्लेषक बताते हैं कि उसमें लंबी व मध्यम अवधि (तीन महीने से लेकर साल भर) का ‘बुलिश’ रुख है और यह बढ़कर 121 रुपए तक जा सकता है। कल यह 1.97 फीसदी बढ़कर 103.30 रुपए पर बंद हुआ है। ग्रेन्यूल्स इंडिया हैदराबाद स्थित दवा कंपनी है। पहले कंपनियों को दवाओं के अवयव (एपीआई) और फॉर्मूलेशन के मध्यवर्ती उत्पाद (पीएफआई) ही बनाकर सप्लाई करती थी। अब पूरी तरह तैयार दवाएं भी बनानेऔरऔर भी

जो भी लोग समझते हैं कि बाजार में करेक्शन इतनी आसानी से आ जाएगा, उनका गलत साबित होना तय है। हां, मैं निफ्टी, बैंकिंग व ऑटो स्टॉक्स को लेकर तेजी की धारणा नहीं रखता, लेकिन मैं रीयल्टी, आइरन ओर और कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों के शेयरों को लेकर जरूर तेजी की सोच रखता हूं। वीआईपी का हाल अभी क्या चल रहा है? इसे मैंने 34 रुपए पर पकड़ा था। आज यह 800 रुपए पर पहुंच चुका है। ट्रेडरऔरऔर भी

बाजार पर नाहक ही तेजी का सुरूर चढ़ा हुआ है। मेरा सुझाव है कि ट्रेडरों को इस सेटलमेंट में तब तक बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है जब बाजार में करेक्शन नहीं आ जाता। फिलहाल करेक्शन इसलिए नहीं आ रहा क्योंकि ट्रेडर अब भी हर बढ़त पर शॉर्ट हुए जा रहे हैं। इस दौरान अगर शॉर्ट सेल भी होती है तब भी आपको अफरातफरी मचाने की जरूरत नहीं है। बाजार खुद को करेक्शन के बिना सेंसेक्स केऔरऔर भी

न तो मेरी राय बदली है और न ही मेरा नजरिया। मैं इस समय रिटेल निवेशकों की दशा-दिशा समझने के लिए देशाटन पर निकला हूं। निफ्टी जब से 5800 के पार गया है, तब से ट्रेडरों और फंडों ने निफ्टी में अपनी शॉर्ट पोजिशन काटनी शुरू कर दी है और वे अब इसकी खरीद या लांग के पक्ष में चले गए हैं। तमाम विश्लेषक भी उन्हें समझा रहे हैं कि निफ्टी 6000 अंक के ऊपर चला जाएगा,औरऔर भी

बाजार का बहुत तेजी से बढ़ना अच्छा नहीं है तो पंटर भाईलोग शॉर्ट सेलिंग करने लगे। पहले कहा जा रहा था कि बहुत धीमा होना बाजार के लिए बहुत बुरा है और इसलिए शॉर्ट सेलिंग हो रही है। अरे भाई मेरे! आप लोग बाजार को कब समझेंगे? निफ्टी 5800 पर है और सारे के सारे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) सेंसेक्स में शामिल स्टॉक खरीदने में जुटे हैं क्योंकि ऐसा करना उनकी मजबूरी है। मैं तो कहूंगा किऔरऔर भी

किसी शेयर के बढ़ने या गिरने से निवेशक पर क्या फर्क पड़ता है? क्या टेक्निकल एनालिस्टों के चार्ट चलते हैं या फंडामेंटल ही शेयर का दमखम तय करते हैं? मेरी राय में आखिरकार फंडामेंटल ही काम करते हैं और हकीकत यही है कि बाजार से चार्ट बनते हैं, न कि चार्ज बाजार को बनाते हैं। हमने हीरो होंडा में बिक्री की पहली कॉल 1926 रुपए पर दी और यह स्टॉक अब गिरते-गिरते 1700 रुपए पर आ गयाऔरऔर भी