बड़ी सलाहकार फर्म है। इंट्रा-डे सलाह के 5000 रुपए महीना लेती है। डेरिवेटिव्स व फॉरेक्स में भी मार करती है। आजमाने के लिए कल मैंने उनकी सलाह ली। इंट्रा-डे में उन्होंने वोल्टास, टाटा मोटर्स व यूनियन बैंक को चुना। स्टॉप-लॉस की नौबत नहीं आई, पर तीनों लक्ष्य से रहे दूर। फिर भी आखिरी एसएमएस में उन्होंने ठोंका कि इन तीन कॉल्स में दिन की कमाई 4153 रुपए। कैसे और कितनी पूंजी पर? सोचते हुए बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

हम न तेजड़िये हैं, न मंदड़िए। हम हैं विशुद्ध ट्रेडर। ज़रा-सा मौका देखकर चोला बदल लेते हैं। वैसे भी शाश्वत तेजड़िया या शाश्वत मंदड़िया जैसी कोई शख्सियत नहीं। यह बाज़ार का गढ़ा मिथ है। जिसको जहां जैसे मौका मिलता है, वैसे कमाता है। हमारी रणनीति होनी कि जो शेयर महंगे चल रहे हैं, उन्हें नीचे आने पर थोड़ा सस्ते में खरीदो और जो शेयर सस्ते चल रहे हैं, उन्हें उठने पर शॉर्ट करो। अब हाल-ए-बाज़ार आज का…औरऔर भी

हम बाज़ार या किसी स्टॉक के बारे में दो-चार सूचनाओं के आधार पर मन ही मन धारणा बना बैठते हैं और उसे बाज़ार पर आरोपित करते हैं। ठाने रहते हैं कि बाज़ार आज नहीं तो कल ज़रूर हमारे हिसाब से चलेगा। चार्ट पर भी हम अपनी पुष्टि के लिए मनमाफिक आकृतियां देख लेते हैं। लेकिन जब तक इस मूर्खता/आत्ममोह से निकलकर हम मुक्त मन से बाज़ार को नहीं देखते, तब तक पिटते रहेंगे। अब दशा-दिशा आज की…औरऔर भी

माना और कहा जाता है कि भाव हमेशा सही होते हैं और वे बाज़ार में खरीदनेवालों और बेचनेवालों के बीच बनी अंतिम सहमति को दर्शाते हैं। लेकिन अगर ऐसा ही होता तो शेयर बाज़ार में वोल्यूम/कारोबार तो शून्य हो जाना चाहिए क्योंकि जब सहमति बन ही चुकी है तो उसे तोड़ेगा कौन? इसलिए भाव को भगवान मान भी लें तो वह हर पल, हर दिन बदलता रहता है और उसे बदलता है इंसान। अब रुख बाज़ार का…औरऔर भी

हम सभी खुद को भीड़ से अलग समझते हैं। लेकिन आफत या अफरातफरी की हालत में भीड़ जैसा ही बर्ताव करते हैं। जब तक हम भीड़-सा बर्ताव करते रहेंगे, तब तक शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नहीं कमा सकते। यह कोई दुस्साहसी काम नहीं है जिसमें लीक छोड़कर भीड़ से उलटा चलना पड़ता है। लेकिन यहां भीड़ से ऊपर उठना ज़रूरी है ताकि हम भीड़ की चाल को भांप सके। टेक्निकल एनालिसिस इसमें मददगार है। अब आगे…औरऔर भी

एक ही साथ दो खेमों का खेल। एक में बढ़ने का भरोसा, दूसरे में गिरने का विश्वास। दोनों अपनी जगह अटल। लेकिन परकाया प्रवेश में माहिर। नेताओं से भी ज्यादा मौकापरस्त। तेजड़िया जब चाहता है मंदड़िया बन जाता है और मंदड़िया तेजड़िया। आप भी कभी पाला बदलकर सोचिए। खरीदा है तो बेचने और बेचा है तो खरीदनेवाले की नज़र से। बाज़ार का मन समझने के लिए यह अभ्यास बहुत ज़रूरी है। अब ढूंढते हैं मौके ट्रेडिंग के…औरऔर भी

विचार और विश्वास धीरे-धीरे हमारी आदत का हिस्सा बन जाते हैं। फिर इन्हीं के चश्मे से हम सच को देखने लगते हैं और वो टेढ़ामेढ़ा हो जाता है। विकृत सच हमें गलत एक्शन को उकसाता है। हम हारने और खीझने लगते हैं। लेकिन आदत की ताकत हासिल कर चुके विचारों को बदला जा सकता है। इसका अचूक तरीका है अभ्यास। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं अभ्यासेन कौन्तेय। अभ्यास को आगे बढ़ाते हुए डालते हैं आज पर नज़र…औरऔर भी

खबरों के आधार पर ट्रेडिंग कभी न करें क्योंकि अगर आपको खबर कंपनी के अंदरूनी सूत्रों से मिली है तो आप और आपके सूत्र को कभी भी इनसाइडर ट्रेडिंग के अपराध में भारी जुर्माना और जेल की सज़ा झेलनी पड़ सकती है। अगर खबर बाहर से मिली है तो 99.99% तय मानिए कि वो अफवाह है। अगर ऐसा न भी हो तो आप तक पहुंचते-पहुंचते शेयरों पर उसका असर हो चुका होता है। अब आज की खासऔरऔर भी