छोटी-छेटी प्रतिक्रियाओं में हम अक्सर बड़े फैसले कर बैठते हैं। राजनीति और ज़िंदगी दोनों में। भूल जाते हैं कि हमारे इन फैसलों से रिश्ते सन्न रह जाते हैं, भावनाएं तड़क जाती हैं। प्रतिक्रिया से हमें सब मिल जाता है, पर उनकी तो ज़िदगी ही उजड़ जाती है।और भीऔर भी

जब तक सब कुछ हासिल है, हम खुद को भगवान का राजकुमार माने बैठे रहते हैं। भूल जाते हैं कि यहां कुछ भी अपने-आप नहीं मिलता। हमें जो भी मिला है, वह हमारे अग्रजों-पूर्वजों के कर्मों का फल है।और भीऔर भी