जनवरी में देश का औद्योगिक उत्पादन 2.4 फीसदी बढ़ा है। यह उम्मीद से दोगुना है। फिर भी इन आंकड़ों के आने के बाद बाज़ार गिरता गया। कारण, लोगों को लग रहा है कि रिजर्व बैंक शायद अब ब्याज दरों में कटौती न करे क्योंकि कल ही ये आंकड़े भी सामने आए कि रिटेल महंगाई की दर फरवरी में बढ़कर 10.91 फीसदी हो गई है। गुरुवार को थोक महंगाई के आंकड़े आने हैं। वैसे अब भी ज्यादातर जानकारऔरऔर भी

बाजार पर गिरावट की हल्की-सी मार पड़ने लगी है। आज जनवरी में उद्योग की विकास दर कितनी बढ़ी, इसे बतानेवाले औद्योदिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े आएंगे और गुरुवार को फरवरी में रही थोक मूल्य सूचकांकों पर आधारित मुद्रास्फीति के। इनसे हफ्ते भर बाद ब्याज दरें घटाने का माहौल बन सकता है। हालांकि रिजर्व बैंक गवर्नर डी. सुब्बाराव फिलहाल ऐसे किसी मूड में नहीं लगते। निफ्टी ने कल 5970 की बाधा तोड़ने की कोशिश की। मगर कामयाबऔरऔर भी

निफ्टी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन 1.41 फीसदी बढ़कर 5940 का स्तर तोड़ चुका है। इसलिए अगर कुछ अघट नहीं हुआ तो अब उसे 6000 का लक्ष्य भेदने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। हालांकि इसे 5970 पर तगड़ी बाधा का सामना करना पड़ा। फिलहाल माहौल में आशावाद है। रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भी तस्दीक कर दी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराते बादल छंट चुके हैं और अगले साल हमारी आर्थिक विकास दर 7 फीसदी से ऊपरऔरऔर भी

तीर ठीक निशाने पर। गुरुवार को निफ्टी बड़े आराम से 5850 का स्तर पार कर गया। वजह है इस साल भी अच्छे मानसून की अच्छी संभावना और विदेशी बाज़ारों में फ्यूचर्स की शुरुआती बढ़त। एस एंड पी 500 और डाउ जोन्स दोनों ही बढ़कर बंद हुए हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने अपने यहां कल 630.47 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद की, जबकि म्यूचुअल फंडों व बीमा कंपनियों समेत घरेलू संस्थाओं की शुद्ध बिक्री 715.11 करोड़ रुपएऔरऔर भी

बुधवार को बाजार सुबह से बढ़ना शुरू हुआ तो शाम तक बढ़ता ही गया। इसमें देश की किसी घटना, वाकये या फैसले का नहीं, बल्कि विदेशी स्थितियों का योगदान था। अमेरिका के डाउ जोन्स सूचकांक का अब तक की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचना बहुत बड़ी बात है। यूरोप में भी शेयर बाजार 2008 के क्रैश के बाद नई ऊंचाई पर हैं। ऐसे खुशनुमा माहौल में आज भी तेज़ी के बने रहने का अनुमान है। हालांकि मामलाऔरऔर भी

अगले दो हफ्ते तक बाजार में कमोबेश शांति का दौर चलेगा। इस दौरान बाजार जमने की कोशिश करेगा। बजट के दिन जितना वो नीचे चला गया था, शायद उससे नीचे अब नहीं जाएगा। बाज़ार का यूं गिरना निवेशकों के लिए अच्छा मौका है। विदेशी निवेशक मॉरीशस के पते पर सरकार की सफाई के बाद फिर से खरीदारी करने लगे हैं। बजट के दिन उन्होंने शुद्ध रूप से 1274.60 करोड़ रुपए के शेयर बेचे थे, वहीं शुक्रवार कोऔरऔर भी

बजट में अर्थव्यवस्था या निवेश संबंधी ऐसा कुछ नहीं था कि शेयर बाजार दोपहर तक ठीकठाक बढ़त के बाद यूं धड़ाम हो जाता। एक करोड़ रुपए से ज्यादा आमदनी वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाना कोई अनहोनी तो है नहीं। फिर भी निफ्टी 1.79 फीसदी की गिरावट के साथ 5693 पर पहुंच गया। असल में गिरावट की असली वजह है तथाकथित विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली। बजट में प्रावधान है कि एफआईआई को टैक्स से बचनेऔरऔर भी

हाथियों की दौड़ में मिट्टी की मिट्टी पलीद हो जाती है। हमारे शेयर बाजार का भी यही हाल है। इसलिए अच्छा है जो छोटे निवेशक यहां से गायब हैं। यहां फिलहाल बड़ों की मार चल रही है। एफआईआई, बीमा कंपनियां व म्यूचुअल फंड दूसरों के पैसों पर खेलते हैं तो उन्हें इसके डूबने पर अंदर से कोई तकलीफ नहीं होती। उनके अधिकारियों व कर्मचारियों को मैनेज किए जा रहे फंड के कमीशन से मोटी तनख्वाह मिलती रहतीऔरऔर भी

अपने शेयर बाजार में, लगता है जैसे तूफान के पहले की शांति चल रही है। दिन के दिन में 2 फीसदी से ज्यादा उछल जानेवाले सूचकांक सीमित दायरे में बंध कर रह गए हैं। जैसे, शुक्रवार 2 नवंबर को निफ्टी नीचे में 5682.55 से ऊपर में 5711.30 तक, यानी 28.75 अंक के दायरे में ही घूम गया। सेंसेक्स का भी यही हाल है। महीने भर पहले 3 अक्टूबर को सेंसेक्स 18,869.69 पर बंद हुआ था तो 2औरऔर भी

बड़े लोग पैसे को दांत से दबाकर रखते हैं। बहुत सोच-समझकर चुनिंदा माध्यमों में लगाते हैं। वहीं, समझदार से समझदार नौकरीपेशा लोग भी शेयर बाजार के लंबा फासला बनाकर चलते हैं। किसान को तो हवा ही नहीं कि यह बाजार चलता कैसे है। बाकी जो लोग बचे हैं, जो कभी यहां से तो कभी वहां से थोड़ी-बहुत कमाई कर लेते हैं, वे उड़ती-उड़ती खबरों की तलाश में रहते हैं ताकि शेयर बाजार से ‘पक्की’ कमाई की जाऔरऔर भी