टीम अण्णा ने वह बात कह डाली जो अभी तक विपक्ष भी इतना खुलकर कहने में हिचकता रहा है। फिर. विपक्ष की विश्वनीयता इतनी कम है कि उसके कहे को राजनीतिक बयानबाजी मानकर कोई तवज्जो नहीं देता। लेकिन टीम अण्णा की बात को देश काफी गंभीरता से ले रहा है और कांग्रेस के तमाम नेताओं से लेकर लालू यादव जैसे विदूषक नेताओं के हमलों के बावजूद आम आदमी को अण्णा हज़ारे और उनके साथ चल रहे सामाजिक-राजनीतिकऔरऔर भी

अण्णा हज़ारे के नौ दिनों के अनशन ने कांग्रेस ही नहीं, सभी राजनीतिक पार्टियों की नींद हराम कर दी है। उन्होंने बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में अण्णा से अनशन खत्म करने की अपील तो की है। लेकिन उन्हें न तो टीम अण्णा की शर्तें मंजूर हैं और न ही जन लोकपाल बिल। यही वजह है कि राजधानी दिल्ली में सात रेस कोर्स स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई सभी दलों की बैठक बेनतीजा साबित हुई। असल मेंऔरऔर भी

सरकार आखिरकार अण्णा हज़ारे के नेतृत्व में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन के आगे झुक गई लगती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चिट्ठी के बाद टीम अण्णा के साथ सरकार की बातचीत की राह खुल गई। लेकिन सरकार यहां भी अपनी चालाकी से बाज नहीं आई है। वह जन लोकपाल विधेयक को भी संसद की स्थाई समिति को सौपने को तैयार है। लेकिन स्थाई समिति के लिए अन्य तमाम सुझावों की तरह यह भी एक सुझावऔरऔर भी