टेक्नोलॉजी रिश्तों को घर-परिवार की सीमा से निकालकर अनंत वर्चुअल विस्तार दे देती है। लेकिन उसका हल्का-सा ग्लिच भी इन रिश्तों को खटाक से तोड़ देता है। फिर बच जाती है एक कचोट और यह अहसास कि हम कितने असहाय हो गए हैं।और भीऔर भी

कोई शेयर बिना किसी वजह के इतना गिर सकता है, यकीन नहीं आता। बांसवाड़ा सिंटेक्स का दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर सात महीने पहले 6 अप्रैल को 149 रुपए के शिखर पर झूम रहा था। लेकिन सवा महीने पहले 28 सितंबर को एनएसई में 78.10 रुपए और बीएसई में 84.05 रुपए तक गिर गया। छह महीने से भी कम वक्त में 47.6 फीसदी की गिरावट। लेकिन इस तरह घटकर करीब-करीब आधा हो जाने की कोई साफऔरऔर भी

ला ओपाला क्रॉकरी और कांच व क्रिस्टल बनी चीजों का ऐसा ब्रांड है जिसकी कोई काट बड़ी मुश्किल है। यह ब्रांड क्वालिटी का पर्याय है। इसके सामान महंगे जरूर हैं। लेकिन देश का बढ़ता मध्य वर्ग इन्हें लपककर खरीदता है। इसे बनानेवाली कंपनी है ला ओपला आरजी लिमिटेड। नाम से लगता है जैसे फ्रांस की कोई कंपनी हो। लेकिन यह पूरी तरह देशी कंपनी है। सुशील झुनझुनवाला इसके प्रबंध निदेशक हैं जो राकेश झुनझुनवाला के रिश्तेदार नहींऔरऔर भी

नेशनल पेरॉक्साइड 1954 में बनी नुस्ली वाडिया परिवार की कंपनी है। नुस्ली के बेटे नेस वाडिया इसके चेयरमैन हैं। कंपनी कल्याण (महाराष्ट्र) की फैक्टरी में तीन रसायन बनाती है – हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, सोडियम परबोरेट व पैरासेटिक एसिड बनाती है। लेकिन इसमें प्रमुख है हाइड्रोडन पेरॉक्साइड जिसमें देश का 40 फीसदी बाजार उसके हाथ में है। कंसोलिडेट आधार पर कंपनी वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी का ईपीएस (प्रति शेयर मुनाफा) 101.23 रुपए और स्टैंड-एलोन आधार पर 100.65 रुपएऔरऔर भी