हमारी जितनी भी ऊर्जा है, सारी की सारी उधार की है। इसे किसी न किसी दिन लौटाना ही पड़ता है। अपने अंदर लेकर बैठे रहे तो कभी चैन नहीं मिलता क्योंकि कर्ज लौटाए बिना उऋण कैसे हो सकते हैं हम?और भीऔर भी