मेहनत का मोल नहीं, प्रतिभा का भाव नहीं। ठगों की बस्ती है। ठगी का दौर है। कोई सीधे-सीधे ठग रहा है तो कोई घुमाकर। सारा कुछ डर और लालच के हमारे शाश्वत भाव का फायदा उठाकर किया जा रहा है। लेकिन यह भी तो एक दौर है। बीत जाएगा।और भीऔर भी

भावुक होना जरूरी है क्योंकि महज बुद्धि के दम पर हम सच तक नहीं पहुंच सकते। लेकिन बुद्धि को कभी इतनी दूर घास चरने नहीं भेज देना चाहिए कि किसी को हमारी भावनाओं से खेलने का मौका मिल जाए।और भीऔर भी

वे लोग बड़े बदकिस्मत होते हैं जिनमें प्यार की उदात्त भावना नहीं होती, जो प्यार न ले पाते हैं, न प्यार दे पाते हैं। प्यार तो वो नेमत है जो प्रकृति ने किसी भी दूसरे जीव को नहीं, सिर्फ इंसानों को बख्शी है।और भीऔर भी

बदलाव शाश्वत है। इसलिए दुख भी शाश्वत है क्योंकि बदलाव से यथास्थिति में मौज कर रहे लोगों को दुख होता है। बदलने वाले भी कष्ट पाते हैं। लेकिन नए की भावना उनकी सारी पीड़ा हर लेती है।और भीऔर भी

ज़िंदगी की तीखी चढ़ाई में हमेशा आस्था की जरूरत पड़ती है जिसके सहारे आप अंदर-बाहर की हर प्रतिकूलता से निपटते हैं। इस आस्था का प्रतीक गुरु, मित्र, देव, पेड़ या आपका कोई प्रिय भी हो सकता है।और भीऔर भी

भावना बोली मैं सही। तर्क बोला मैं सही। भावना तर्क को उलाहना देती है कि तेरे रूखे-सूखे ज्ञान मार्ग से बाहर की दुनिया सधती है, अंदर की कलसती है। तर्क कहता है – तेरा भक्ति मार्ग सरासर मूर्खता है। तकरार जारी है।और भीऔर भी