जब भी कभी रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति या उसकी समीक्षा पेश करनेवाला होता है तो उसके हफ्ते दस-दिन पहले से दो तरह की पुकार शुरू हो जाती है। बिजनेस अखबारों व चैनलों पर एक स्वर से कहा जाता है कि ब्याज दरों को घटाना जरूरी है ताकि आर्थिक विकास की दर को बढ़ाया जा सके। वहीं रिजर्व बैंक से लेकर राजनीतिक पार्टियों व आम लोगों की तरफ से कहा जाता है कि मुद्रास्फीति पर काबू पाना जरूरीऔरऔर भी

केन्द्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि गठबंधन राजनीति के इस दौर में आपको अपने साथ बाकी लोगों को भी लेकर चलना होता है। इसलिए निर्णय प्रक्रिया में आपसी सहमति जरूरी है। बुधवार को अर्थशास्त्रियों के साथ बजट-पूर्व चर्चा में वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष काफी चुनौतियों से भरा रहा है। इस वर्ष मुद्रास्फीति की समस्या, राजकोषीय घाटे और सतत व समावेशी विकास को बनाए रखने जैसी समस्याओं का सामना करना पडा।औरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड का मानना है कि यूरो मुद्रा का ‘अंत’ इस साल होने के कोई आसार नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि जल्दी ही आईएमएफ की जारी होनेवाली रिपोर्ट के मुताबिक इस साल विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर सितंबर में घोषित 4 फीसदी के अनुमान से कम रहेगी। फिलहाल दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर रहीं लैगार्ड ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सवाल है कि क्या 2012 यूरोऔरऔर भी