दीर्घकालिक निवेश में देखते हैं कि कंपनी के भावी कैश-फ्लो के आधार पर उसके शेयर का अंतर्निहित मूल्य कितना है। अगर बाज़ार भाव उससे कम तो निवेश बनता है। नहीं तो उससे दूर रहना भला। दिक्कत यह है कि ज्यादातर शेयर अभी अंतर्निहित मूल्य से काफी ऊपर चल रहे हैं। जब सस्ते थे तो हमारे बताने के बावजूद किसी ने पूछा नहीं। अब सब दौड़े पड़े हैं। भागमभाग के बीच तथास्तु में मैराथन की सामर्थ्य वाला स्टॉक…औरऔर भी

स्मॉल कैप स्टॉक्स में निवेश इसीलिए करते हैं कि उनमें कई गुना बढ़ने की संभावना होती है। लेकिन जब सभी स्मॉल कैप कंपनियों की तरफ टूट पड़े हों तो उनके भाव ज्यादा ही चढ़ जाते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बीएसई सेंसेक्स फिलहाल 17.88 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि उसका स्मॉल कैप सूचकांक 116.05 के पी/ई पर। आखिर, इतनी महंगी चीज़ के पीछे क्यों भागें! तो, आज तथास्तु में एक लार्जकैप स्टॉक…औरऔर भी

महंगाई साल-दर-साल बढ़ती है। देशी घी तीन साल पहले 250 रुपए/किलो था, अभी 400 रुपए/किलो हो चुका है। फिर कंपनी के शेयरों में महंगाई क्यों नहीं आती? आती है, बल्कि सच कहें तो अच्छी कंपनियां ही महंगाई को मात दे पाती हैं। इसीलिए महंगाई को बेअसर करने के लिए उनमें धन लगाया जाता है। तीन साल पहले यहां सुझाया सुप्रीम इंडस्ट्रीज़ का शेयर 155 से 460 हो चुका है। आज तथास्तु में एक मिडकैप कंपनी…और भीऔर भी

जिस तरह गलत लोगों के बहकावे पर गलत लोगों को चुनने से राजनीति गलत नहीं हो जाती, उसी तरह गलत लोगों के कहने पर गलत कंपनियां चुनने से शेयर बाज़ार गलत नहीं हो जाता। इसका एक और उदाहरण। हमने इसी जगह 15 सितंबर 2010 को आरती ड्रग्स में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 137 रुपए था। अभी 372 के शिखर पर है। साढ़े तीन साल में 171.5% ऊपर! अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अक्सर हम निवेश के लिए कोई कंपनी अंदाज़ से चुनते हैं या आलस्य कर जाते हैं कि ऊपर-ऊपर तो अच्छी दिख रही है। ऐसा निवेश ज़्यादातर धोखा देता है। वहीं, जब हम रिसर्च के दम पर निवेश करते हैं तो उसका बढ़ना लगभग तय रहता है। दो साल पहले हमने यहीं वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स के दोगुना होने की संभावना जताई थी। वो शेयर तब 480 पर था, अभी 1060 पर है। तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

जानी-मानी रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में सौ से ज्यादा लिस्टेड कंपनियों के अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला है कि फंडामेंडल स्तर पर मजबूत कंपनियां दो से पांच साल में पूरे बाज़ार से बेहतर रिटर्न देती हैं। अप्रैल 2011 से मार्च 2013 के बीच ऐसी कंपनियों ने निफ्टी से 2.2% और सीएनएक्स मिडकैप सूचकांक से 5% ज्यादा सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न दिया है। हम यहां ऐसी ही कंपनियों को छांटकर पेश करते हैं। आज एक औरऔरऔर भी

लोग कहते हैं कि भारत में निवेश की लांगटर्म स्टोरी खत्म हो गई। लेकिन ऐसा अमेरिका, जापान या जर्मनी में हो सकता है, भारत में नहीं। कारण, बड़े देशों में अर्थव्यवस्था या तो ठहराव की शिकार है या कांख-कांख कर बढ़ रही है, जबकि भारत में असली उद्यमशीलता तो अब करवट ले रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था को कम-से-कम अभी 25 साल लगेंगे खिलने में। तब तक यहां फलता-फूलता रहेगा लांगटर्म निवेश। परखते हैं ऐसा ही एक निवेश…औरऔर भी

सेषासायी पेपर 51 साल पुरानी तमिलनाडु की कंपनी है। उत्तर भारत की कंपनी होती तो सही नाम शेषाशायी होता। शेषाशायी विष्णु का पर्यायवाची है जिसका शाब्दिक अर्थ है शेषनाग पर शयन करनेवाला। खैर, नाम में क्या रखा है! कंपनी ने पिछले महीने 23 जुलाई को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित किए। इसके मुताबिक साल भर पहले की समान अवधि की तुलना में उसका बिक्री 9.69 फीसदी बढ़कर 120.08 करोड़ से 131.71 करोड़ रुपएऔरऔर भी

हर दिन 52 हफ्तों का पहला या आखिरी दिन होता है और हर दिन कोई कंपनी 52 हफ्ते का शिखर बनाती है तो कोई कंपनी 52 हफ्ते के रसातल पर चली जाती है। तो क्यों न हम रसातल में जानेवाली कंपनियों से कुछ समय के लिए ध्यान हटाकर उन कंपनियों पर लगाएं तो अपनी संभावनाओं के दम पर इस पस्त बाजार में भी सीना तानकर बढ़ी जा रही हैं। ऐसी ही एक कंपनी है कार्बोरनडम यूनिवर्सल। उसकेऔरऔर भी