लोकतंत्र कोई धर्म या पंथ नहीं, जहां सब कुछ आस्था व भावना से तय होता है। यहां अगर कोई भावनाओं को भड़का कर आपको लुभाता है तो समझ लेना चाहिए कि उसकी नीयत में कोई गहरा खोट है।और भीऔर भी