हम भावनाओं के भूखे हैं। सिर्फ लेना चाहते हैं, देना नहीं। ज्ञान में ठीक इससे उलट हैं। सिर्फ देना चाहते हैं लेना नहीं। काश! ज्ञान के मामले में हम शाश्वत भिक्षु बन जाते और भावनाओं के मामले में दानवीर कर्ण। आमीन!और भीऔर भी