साल 2001 से लेकर बीते ग्यारह सालों में लगातार टीम इंडिया के आधिकारिक प्रायोजक रहे सहारा इंडिया परिवार ने क्रिकेट से ही नाता तोड़ने का फैसला कर लिया है। वह न तो अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से कोई नाता रखेगा और न ही इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भागादारी करेगा। सहारा ने बीसीसीआई से अनुरोध किया है कि आईपीएल टीम पुणे वॉरियर्स की टीम किसी और को दे दी जाए। सहारा ने वर्ष 2010 मेंऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हारून लोर्गट का मानना है कि भारतीय उप महाद्वीप में सट्टेबाजी को वैध कर देना चाहिए। इससे सट्टेबाजों पर निगाह रखने में मदद मिलेगी और ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना भी आसान हो जाएगा।’ लोर्गट ने कहा, ‘‘यदि इस कारोबार को वैध बना दिया जाता है तो फिर आप वास्तव में उनके साथ मिलकर काम करोगे। ऐसे में उन पर बेहतर तरीके से निगरानी रखी जा सकती है। यदिऔरऔर भी

पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ गोलबंद। दस करोड़ एसएमएस। देश के करीब 80 शहरों से 44 लाख ट्वीट। पुरानी पीढ़ी से लेकर नई पीढ़ी तक। जगह-जगह हजारों लोग हाथों में मोमबत्तियां लिए अण्णा हजारे के साथ आ खड़े हुए। सरकार को इस जन-उभार के आगे झुकना पड़ा। इसी के साथ एक और बात सामने आई है कि हम जिन्हें राष्ट्रवाद के साथ जोड़कर देखते हैं, हमारे वे क्रिकेट खिलाड़ी केवल उस बीसीसीआई के लिए खेलते हैं जिसकेऔरऔर भी

कृषि मंत्री शरद पवार ने खेल मंत्री अजय माकन, सूचना प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी व पर्यटन मंत्री कुमारी शैलजा लेकर वित्त मंत्रालय तक के एतराज के बावजूद आईसीसी (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) को भारत में खेले गए सभी विश्व कप मैचों पर टैक्स में छूट दिला दी है। इससे आईसीसी को कम से कम 45 करोड़ रुपए का फायदा होगा। पवार ने गुरुवार को कैबिनेट से यह प्रस्ताव पास करवा लिया। इसमें उनकी पार्टी एनसीपी के सदस्य औरऔरऔर भी