हम बहुत सारी चीजों को देखते हुए भी देख नहीं पाते क्योंकि उन्हें हम सरसरी व सामान्य नज़र से देखते हैं। हमें उनकी विशिष्टता का बोध नहीं होता। उसी तरह जैसे सब कुछ समान होते हुए भी घोड़े, कुत्ते और चूहे को अलग-अलग दिखता है।और भीऔर भी

जब आप खास होते हो तो लोग आपको देखते हैं। लेकिन जब आम होते हो तो आप सबको देखते हो। इसलिए जिन्हें भी दुनिया को सही से देखना-समझना है, उनके लिए आम बने रहना ही ज्यादा अच्छा।और भीऔर भी

महान लोग कहीं आसमान से नहीं टपकते। वे हमारे-आप जैसे ही लोग होते हैं। दिक्कत यह है कि हम महानता की आभा में खोकर छाया के पीछे भागते रहते हैं। महान बनने के परिणाम को देखते हैं, प्रक्रिया को नहीं।और भीऔर भी