इस समय बैंकों के करीब 2.98 लाख करोड़ रुपए रिजर्व बैंक के पास सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) के रूप में पड़े हैं, जिस पर उन्हें कोई ब्याज नहीं मिलता। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बैंकों की कुल जमा इस समय 62,82,350 करोड़ रुपए है। इसका 4.75 फीसदी उन्हें हर समय बतौर सीआरआर रिजर्व बैंक के पास रखना पड़ता है। इसलिए अगर देश के सबसे बैंक एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने सीआरआर को खत्म करनेऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चीनी क्षेत्र को नियंत्रण-मुक्त करने के मुद्दे पर एक विशेषज्ञ समिति बना दी है। इसकी अध्यक्षता उनकी आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन डॉ. सी रंगराजन को सौंपी गई है। समिति में वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु, कृषि लागत व मूल्य आयोग (सीएसीपी) के चेयरमैन अशोक गुलाटी और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सचिव के पी कृष्णन को मिलाकर कुछ छह सदस्य होंगे। सरकार ने खाद्य व उपभोक्ता मामलात मंत्रालयऔरऔर भी

केंद्र सरकार अपने आर्थिक खुफिया तंत्र को और भी चौकस बनाने में जुट गई है। इस सिलसिले में सेंट्रल इकनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो (सीईआईबी) की भूमिका, कामकाज व सांगठनिक ढांचे की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को सौंप दी। इस समिति का गठन मार्च 2011 में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के पूर्व सदस्य एस एस खान की अध्यक्षता में किया गया था। समिति ने करीब तीन महीनेऔरऔर भी

सरकार ने डीम्ड निर्यात नीति के दुरुपयोग को रोकने और इसमें जरुरी सुधार के लिए सभी संबद्ध पक्षों से सुझाव मांगे हैं। सरकार को इस नीति के दुरूपयोग की रिपोर्टें बराबर मिल रही हैं, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र में। डीम्ड निर्यात ऐसा कारोबार है जिसमें वस्तुओं को देश से बाहर नहीं भेजा जाता है, बल्कि इसका इस्तेमाल देश में ही होता है। इस प्रकार के सौदों के लिए भुगतान भी किसी भी मुद्रा में किया जा सकता है।औरऔर भी

देश में कैलेंडर वर्ष 2010 के दौरान में 21 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया जो पिछले वर्ष से 22% कम है। उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009 में एफडीआई 27 अरब डॉलर (27,044 करोड़ रुपए) रहा था। वित्त वर्ष की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2010 में एफडीआई में 23% गिरावट दर्ज की गई और यह 16.03 अरब डॉलर रहा जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 20.86 अरब डॉलर था। रिजर्वऔरऔर भी

दो साल पहले वर्ष 2008- 09 में दुनिया को हिलाकर रख देनी वाली आर्थिक मंदी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार था, इसका पता लगाते हुए एक अमेरिकी समिति ने कहा है कि लोगों की कारगुजारी से लेकर नियामक विफलता और नीति निर्माता सभी इस संकट के लिए जिम्मेदार रहे हैं। वित्तीय संकट जांच आयोग की 500 से अधिक पृष्ठों की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। अमेरिकी संसद ने संकट के कारणों का पता लगाने केऔरऔर भी