इंद्रियां हैं, हार्मोंस हैं, तभी जीवन है। नहीं तो मर गए समझो। मेलमिलाप, सुख-दुख इन्हीं से तो है। कोई इंद्रजीत नहीं। संत नहीं, ढोंगी हैं। हां, दुनिया-समाज को समझने के लिए अपने से बाहर निकलना पड़ता है जिसके लिए इंद्रियों का शमन करना पड़ता है।और भीऔर भी

आपने दो लाख का मेडिक्लेम लिया है तो जरूरी नहीं कि अस्पताल में भर्ती होकर कराए गए इलाज का पूरा क्लेम आपको मिल जाए। कवर में हर खर्च की सीमा है। जैसे, आप कवर का अधिकतम 1% ही अस्पताल के कमरे पर खर्च कर सकते हैं। कमरे का किराया अगर 3000 रुपए/दिन है तो आपको 2000 रुपए ही मिलेंगे। यही नहीं, ऐसा होने पर आपका सारा कवर इसी अनुपात में घट जाएगा। अगर आपके इलाज पर कुलऔरऔर भी

प्रवासी भारतीय उद्यमी और इस्पात जगत के बेताज बादशाह लक्ष्मी मित्तल के खिलाफ उनके एक पुराने व्यवसायी दोस्त ने उसकी लाखों डॉलर की फीस मारने आरोप में अदालत में दावा किया है। ब्रिटेन के अखबार गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार चावल व्यापारी मोनी वर्मा ने दावा किया है कि उसने मित्तल को नाइजीरिया के एक पूर्व राष्ट्रपति से तेल का सौदा कराने में मदद दी थी। इसके बदलने मित्तल ने लाखों डॉलर की फीस देने काऔरऔर भी

आमतौर पर जीवन बीमा का फॉर्म हम खुद नहीं भरते। एजेंट निशान बनाकर देता है कि यहां-यहां आपको दस्तखत करने हैं और हम कर देते हैं। हम शर्तों को तो क्या, फॉर्म तक को ठीक से पढ़ने की जहमत नहीं उठाते। लेकिन यह कानूनन गलत है। कानून के मुताबिक जीवन बीमा का फॉर्म बीमाधारक की अपनी हैंडराइटिंग में भरा जाना जरूरी है। नहीं तो बीमा कंपनी इसी बात को आधार बनाकर उसका क्लेम खारिज कर सकती है।औरऔर भी

कहते हैं कि ग्राहक भगवान होता है पर अभी कुछ समय पहले तक भारत की बीमा कंपनियों का सोचना इससे उलट था। उनके लिए पॉलिसीधारक ऐसा निरीह प्राणी होता था जो शायद परेशानी सहने के लिए अभिशप्त है। लेकिन बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (आईआरडीए या इरडा) की पहल से अब माहौल बदल चुका है। कैसी समस्याएं: अमूमन जीवन बीमा पॉलिसीधारकों को जो समस्याएं सताती हैं उनमें खास हैं – पॉलिसी बांड नहीं मिला, गलत पॉलिसी बांडऔरऔर भी

मुंबई के मलाड में रहनेवाले मेरे मित्र अहिंद्र वर्मा पिछले दिनों अपने ऑफिस के काम से सिंगापुर दौरे पर गए हुए थे तो उनके घर में सेंधमारी हो गई। अज्ञात सेंधमार उनके घर से काफी जेवरात, बेशकीमती कलाकृतियां, सजावटी सामान, कपड़े व घड़ियां लेकर चंपत हो गए। इस सेंधमारी में बड़ी तरतीब से सजाया हुआ घर भी तकरीबन तहस-नहस हो गया। इस मामले में वर्मा को लगभग सात लाख रुपए का नुकसान हुआ। वे बताते हैं किऔरऔर भी

क्या आपने अपने जेवरातों का बीमा करवाया है? यदि आपका जवाब न में है तो आप देर मत कीजिए। आपके कीमती जेवरात हों या आपका पर्स उनको बीमा सुरक्षा देना बहुत जरूरी है। आज के समय में चोरी व लूट के साथ पॉकेटमारी की घटनाएं इस कदर बढ़ गई हैं कि हमेशा चिंता बनी रहती है कि अपनी मूल्यवान वस्तुओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए? इसका सबसे सरल तरीका है कि जेवरातों का बीमा करवा लीजिए। यहऔरऔर भी