जनगणना के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि देश में 1991 के बाद से किसानों की संख्या करीब 1.50 करोड़ घट गई है, जबकि 2001 के बाद यह कमी 77 लाख से थोड़ी ज्यादा है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो पिछले बीस सालों में हर दिन औसतन 2035 काश्तकार या किसान अपनी स्थिति से बेदखल होते जा रहे हैं। जानेमाने कृषि विशेषज्ञ और अंग्रेज़ी अखबार ‘द हिंदू’ में ग्रामीण मामलों के संपादक पी साईनाथ ने अपने एकऔरऔर भी

बिहार में अब पहले से थोड़े ज्यादा लोग अब शहरों में रहने लगे हैं। 2001 तक राज्य की आबादी का 10.50 फीसदी हिस्सा शहरों में रहता था, जबकि 2011 में यह आंकड़ा बढ़कर 11.30 फीसदी हो गया है। लेकिन दस साल में मात्र 80 आघार अंकों या 0.80 फीसदी की वृद्धि से लगता है कि वहां शहरीकरण का सिलसिला एकदम कच्छप गति से चल रहा है। बिहार के जनगणना निदेशालय में संयुक्त सचिव ए के सक्सेना नेऔरऔर भी

2011 की जनगणना के अनुसार देश की 121 करोड़ की आबादी का 56.9% हिस्सा 15 से 59 साल यानी काम करने की उम्र का है। 60 साल या इससे ऊपर की आबादी का अनुपात 7.5% है। बाकी 35.6% बच्चे हैं 15 साल से कम उम्र के। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी कहते हैं कि अगले तीस सालों में देश में दूसरों पर निर्भर रहनेवालों का अनुपात तेजी से घटेगा। अगले बीस सालों में कामकाजी आबादी तेजी से बढ़ेगीऔरऔर भी

ई-पंचायत की अवधारणा को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्‍यों व केन्‍द्र-शासित क्षेत्रों को राष्‍ट्रीय पंचायत निदेशिका प्रोफाइलर तैयार करने की सलाह दी है। पंचायती राज मंत्रालय का सुझाव है कि हर पंचायत का एक विशिष्‍ट कोड होना चाहिए, क्‍योंकि सभी आवेदन इन विशिष्‍ट कोड पर आधारित होंगे। मंत्रालय का कहना है कि राज्‍यों को यह काम तुरंत पूरा कर लेना चाहिए। हालांकि अभी जीपीएस 2001 की जनगणना के कोड से मापे जाते हैं।औरऔर भी

देश की जनसंख्या बीते एक दशक में 18.1 करोड़ बढ़कर अब 121 करोड़ हो गई है। जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में पुरुषों की संख्या अब 62.37 करोड़ और महिलाओं की संख्या 58.64 करोड़ है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रयास कर रहे देश के लिए अच्छी खबर यह है कि आबादी की वृद्धि दर में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 1991 की गणना में आबादी में 23.87 फीसदी की वृद्धि देखी गयी थी, 2001औरऔर भी