जब हमें लगता है कि हम तो निमित्त मात्र  हैं और हमारे पीछे कोई बड़ी शक्ति काम कर रही है तो हम मां की गोद में पड़े बच्चे की तरह बेधड़क किलकारियां मारने लगते हैं। आस्था का यही फायदा है।और भीऔर भी

जो लोग ज़िंदगी को बोझ समझते हैं, वे कुछ न करें तो चलता है। लेकिन जो लोग ज़िंदगी को जमकर जीना चाहते हैं, वे अगर आकस्मिकता की तैयारी नहीं रखते तो वे बिंदास नहीं, बेवकूफ हैं।और भीऔर भी