एक इंसान की भावनाएं, उसका मनोविज्ञान पढ़ना बहुत मुश्किल नहीं। लेकिन जहां लाखों लोगों की भावनाएं जुड़ी हों, वो भी दया, माया या करुणा जैसे आदर्श नहीं, बल्कि धन जैसे ठोस स्वार्थ से जुड़ी हों, जहां देशी ही नहीं, विदेशी निवेशक तक शामिल हों, वहां समूह के मनोविज्ञान को पढ़ना बहुत मुश्किल है। फिर भी हम बाज़ार में इन्हें कैंडलस्टिक से पढ़ते हैं और यह रिवाज़ करीब 300 साल पुराना है। अब पढ़ते हैं शुक्र का भाव…औरऔर भी

कोई शेयर अगर नई खबर आने पर जमकर घट-बढ़ गया और हम उसकी चाल को नहीं पकड़ पाए तो यह हमारी गलती नहीं, बल्कि सीमा है। न्यूज़ के मामले में हम हमेशा फिसड्डी ही रहेंगे। दूसरा हमें खबर नहीं, झांसा देता है। चैनल हमें बम नहीं, उसकी खाली खोल थमाते हैं। लेकिन सामान्य हालात में अगर हम खरीदने-बेचनेवालों का संतुलन देखकर शेयर की भावी चाल नहीं भांप सके तो यह हमारी कमज़ोरी है। अब धार मंगलवार की…औरऔर भी

बाज़ार में मूलतः दो तरह की गतियां होती हैं। पहली, जिनके पीछे कोई न कोई घटनाक्रम, कोई खबर होती है। इनको पकड़ना आसान लगता है। लेकिन है बहुत कठिन। फिर खबर हमारे पास पहुंचे, इससे पहले ऊंची पहुंच वाले उसे पकड़कर बाज़ार में खेल कर चुके होते हैं। दूसरी गति अनायास होती है। उसके पीछे कोई प्रत्यक्ष वजह नहीं होती। कमाल की बात है कि अनायास होनेवाली इस गति को पकड़ना आसान है। अब आज का व्यवहार…औरऔर भी

तैयारी हर तरफ है। वित्त मंत्रालय सेबी व रिजर्व बैंक समेत शीर्ष वित्तीय नियामकों की बैठक कर चुका है। शेयर बाज़ार व बांड बाज़ार को संभालने की खास तैयारियां हैं। बैकों को खासतौर पर हिदायत दी गई है कि बड़ी लांग पोजिशन लेने से बचें। अनिश्चितता के बीच आशंका! कहीं 17 मई 2004 या 16 मई 2009 जैसा हाल न हो जाए जब बाज़ार ने जबरदस्त तूफान मचाया था। इस बार क्या रहेगा उपयुक्त, देखते हैं आगे…औरऔर भी

जो बढ़ चुके हैं या जिनमें हर हाल में बढ़ने का दमखम है, उन्हें फिलहाल बेचकर मुनाफा कमाओ और जो थोड़ा रिस्की हैं, उथले हैं, उन्हें चढ़ाते जाओ ताकि बाज़ार के गिरते ही बेचकर अच्छा-खासा मुनाफा कमा लिया जाए। निफ्टी कल भले ही फ्लैट रहा हो, लेकिन निफ्टी मिडकैप 50 सूचकांक 1.88% बढ़ गया। बड़े खिलाड़ियों की यही रणनीति चल रही है इस समय। हम भी उनके नक्शे-कदम पर चलकर कमा सकते हैं। अब शुक्र का बाज़ार…औरऔर भी

आदर्श स्थिति वो होती कि हर कोई जीतता, मुनाफा कमाता और कोई न हारता, कहीं कोई हैरान-परेशान ट्रेडर नहीं होता। लंबे निवेश में हर किसी के जीतने की स्थिति होती है। लेकिन ट्रेडिंग में तो कतई नहीं। इसलिए जबरदस्त होड़ से भरे इस बाज़ार में आप अपनी गाढ़ी कमाई लगाने से अच्छी तरह समझ लीजिए कि करने क्या जा रहे हैं। जान लें कि आपके सामने उल्टा ट्रेड कौन कर रहा है। अब आगाज़ करें शुक्रवार का…औरऔर भी

क्यूपिड का मतलब है प्रेम का देवता, कामदेव। इसी के नाम पर 1985 में बनी क्यूपिड ट्रेड्स एंड फाइनेंस। मुंबई के पंचरत्न ओपरा हाउस में दफ्तर है। केतनभाई सोराठिया इसके कर्ताधर्ता हैं। कल सुबह एसएमएस आया कि क्यूपिड ट्रेड्स को 145 पर खरीदें, महीने भर में 460 तक जाएगा। अरे भाई, कैसे? सालों से कंपनी का धंधा तो निल बटे सन्नाटा है! सावधान रहें ऐसे प्रेम-पत्रों से। झांसे में कतई न आएं। अब देखें गुरुवार का बाज़ार…औरऔर भी

बुधवार को मैंने एक फर्म से ट्रेडिंग टिप्स का एक दिन का मुफ्त ट्रायल लिया। एसएमएस आया कि लार्सन एंड टुब्रो पर उसके पास अंदर की 100% पक्की खबर है। 1000 रुपए का पुट ऑप्शन 22 में लपककर लीजिए। स्टॉप-लॉस 10, लक्ष्य 42 रुपए। उसी दिन लार्सन एंड टुब्रो के नतीजे आए। शेयर बढ़ा, पुट ऑप्शन का बेड़ा गरक। दरअसल ऐसी फर्में अंदर की खबरों के नाम पर बेवकूफ बनाती हैं। ऐसे झांसों से बचकर करें ट्रेडिंग…औरऔर भी

रामचरित मानस की यह चौपाई याद कीजिए कि मुनि वशिष्ठ से पंडित ज्ञानी सोधि के लगन धरी, सीताहरण मरण दशरथ को, वन में विपति परी। जीवन और बाज़ार की यही खूबसूरती है कि वह बड़े-बड़े विद्वानों की भी नहीं सुनता। जहां लाखों देशी-विदेशी निवेशकों का धन-मन लगा हो, भाव हर मिनट पर बदलते हों, वहां बाज़ार को मुठ्ठी में करने का दंभ भला कैसे टिकेगा! इसलिए फायदे के साथ रखें घाटे का हिसाब। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार का सबसे अहम रोल है भावों का सही-सही स्तर पकड़ना। इस काम में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। लेकिन शेयर बाज़ार में है यह बड़ा मुश्किल काम। एक तो यहां हज़ारों दमदार खिलाड़ी हैं। दूसरे भाव हर मिनट पर बदलते हैं। तीसरे यहां पर्दे के पीछे बहुत सारा खेल चलता है। कंपनी प्रवर्तकों, ब्रोकरों व संस्थागत निवेशकों में मिलीभगत रहती है। ऐसी इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकने के उपाय तलाशे जा रहे हैं। अब बढ़े ट्रेडिंग की ओर…औरऔर भी