मन कहता है भगत सिंह हों। बुद्धि कहती है कि मेरे घर नहीं, दूसरे के घर। बोल वचन में हम किसी से कम नहीं। लेकिन कर्म की अपेक्षा दूसरों से करते हैं। दूसरे नहीं करते तो दोष उनका। यूं ही कड़ी से कड़ी चलती जाती है और होता कुछ नहीं।और भीऔर भी

आप सभी को चैत्र शुक्‍ल पक्ष प्रतिपदा यानी, नव संवत्सर के पहले दिन गुड़ी पडवा के साथ ही उगाड़ी, चेटीचंद, नवरेह और साजिबू चेइराओबा पर्व की बहुत-बहुत बधाइयां। वाकई, अपने देश की इतनी विविधता देख मन मगन हो जाता है। लेकिन आज का दिन थोड़े दुख का दिन भी है। आज भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत का दिन है। यूं तो शहीदों का बलिदान दिवस दुख मनाने का नहीं, बल्ले-बल्ले करने का होता है। लेकिनऔरऔर भी

भगत सिंह 23 साल ही जीकर अमर हो गए। 39 साल के जीवन में विवेकानंद दुनिया पर अमिट छाप छोड़ गए। ऐसा इसलिए क्योंकि वे अपने लिए नहीं, उन अपनों के लिए जिए जो परिवार तक सीमित नहीं थे।और भीऔर भी