मैंने कल बिजनेस स्टैंडर्ड में एक रिपोर्ट पढ़ी जिसमें संवाददाता ने किसी शेयर को ट्रेड टू ट्रेड श्रेणी में डालने के तौर-तरीकों को लेकर स्टॉक एक्सचेंज के अधिकारियों पर कुछ खरे-खरे आरोप लगाए हैं। इसमें भ्रष्टाचार तक का आरोप शामिल है। इन आरोपों की वाकई जांच-पड़ताल की जानी चाहिए और पुष्टि के लिए प्रमाण भी जुटाए जाने चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि किसी शेयर को ट्रेड टू ट्रेड से दोबारा सामान्य श्रेणी मेंऔरऔर भी

बाजार (सेंसेक्स) खुला मुहूर्त से करीब 37 अंक बढ़कर, मगर बंद हुआ 152.58 अंक की गिरावट के साथ 20,852.38 पर जाकर। लेकिन घबराने की कोई बात नहीं। यह सब कुछ नहीं, बस मछली पकड़ने के जाल जैसा काम है। जाल को नीचे तक ले जाओ ताकि और मछलियां पकड़ में आ जाएं। बाजार अब पूरी तरह नियंत्रण में है और उतार-चढ़ाव इसलिए लाए जा रहे हैं ताकि आप यहां से वहां तक झूल, या कहें तो झूमऔरऔर भी

बहुत ही मरा-मरा सा दिन रहा आज का। इधर या उधर, किसी भी तरफ कोई खास हलचल नहीं दिखी। निफ्टी के 6150 पहुंचते ही तेजड़ियों ने बाजार की कमान अपने हाथ में ले ली और मंदड़िये 6130 अंक का इंतजार ही करते रह गए। आकिर में वे भी तेजड़िये के पाले में जा गिरे क्योंकि निफ्टी नवंबर फ्यूचर्स बंद हुआ है 6155 के स्तर पर, जो अपने-आप में तेजी का संकेत है। हमारी स्ट्रीट कॉल टीम कोऔरऔर भी

न भूतो न भविष्यते…रोलओवर के दौरान सागर में जैसा चमकता मोती? बाजार के आखिरी आधे घंटे ने यकीनन मुझे गलत साबित कर दिया। ऐसा नियोजित और सटीक खेल खेला गया जो मेरे लिए एकदम नया था और जिसका अनुमान लगाना वाकई नामुमकिन था। मैं यह बात दिल से स्वीकार करता हूं। कितना विकसित और प्रोफेशनली नियमित है हमारा भारतीय पूंजी बाजार! जिन्होंने इस बाजार की व्यवस्थाएं बनाई हैं, उन्हें बधाई दी जानी चाहिए और सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कारऔरऔर भी

हमें यकीन नहीं था कि बाजार खुद को ऊपरी स्तर पर टिकाए रख पाएगा, फिर भी हमने शॉर्ट सौदे काटने को क्यों कहा? यह एक बड़ा सवाल है और आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों है? तो जवाब है कि बारिश ने भारत की विकासगाथा को धुंधला कर दिया है। राष्ट्रमंडल खेलों की भयंकर खामियों व घपलों ने विदेश में भारत और भारतीय राजनीति की छवि को दागदार बना दिया है। अभी देश के जीडीपी कीऔरऔर भी

कल माइक्रोसॉफ्ट के अच्छे नतीजों ने अमेरिकी बाजार को टॉप गियर में पहुंचा दिया। लेकिन आज सुबह से ही ईमेल आने शुरू हो गए कि स्पेन के 18 बैंक स्ट्रेस टेस्ट (प्रतिकूल हालात से निपटने की क्षमता की परीक्षा) में फेल हो गए हैं। चेतावनी दी गई कि मेटल सेक्टर गिरनेवाला है। ऐसी तमाम सारी हाय-हाय मचाई गई। आप अच्छी तरह समझ लें कि ये सब मंदड़ियों की कुंठा व हताशा है जो इस तरह की खबरोंऔरऔर भी

तेल कीमतों पर नियंत्रण हटाने के सरकारी फैसले के बावजूद बाजार गिर कर बंद हुआ। हालांकि सभी तेल कंपनियों के शेयर 10-15 फीसदी बढ़ गए। मीडिया में आई खबर के मुताबिक खुफिया विभाग (आईबी) ने इसी हफ्ते ऑयल स्टॉक्स पर बिग बुल्स की गिरफ्त की सूचना प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजी थी। फिर भी इसी हफ्ते में तेल मूल्यों से नियंत्रण हटाने का फैसला हो गया। इसका मतलब यह हुआ कि सरकार ने बिना इसका इंतजार किएऔरऔर भी